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Ganesh Chaturthi: गणपति विराजे हैं सपरिवार, संग हैं पत्नी रिद्धी-सिद्धी व पुत्र शुभ-लाभ

Ganesh Chaturthi: गणपति विराजे हैं सपरिवार, संग हैं पत्नी रिद्धी-सिद्धी व पुत्र शुभ-लाभ

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हिण्डौनसिटी. शिव परिवार के अलावा आमतौर पर प्रथम पूज्य गणपति अकेले विराजमान नजर आते हैं। लेकिन शहर में पुरानी कचहरी के पास पाठक पाड़ा में भगवान गणेशजी पत्नी और पुत्रों के साथ सपरिवार विराजित हैं। खास बात यह है पत्नी रिद्धि-सिद्धि पुत्र शुभ-लाभ के साथ बैठे गणपति की प्रतिमा की वक्रतुण्ड (सूंड) रणथभौर के त्रिनेत्र गणेशजी की भाति दायी ओर है। मंदिर के महंत मदनमोहन शर्मा ने बताया कि गणेश मंदिर की प्रतिमा करीब 355 वर्ष प्राचीन है। पहले गणेशजी की प्रतिमा मौजूदा मंदिर के सामने रियासतकालीन हवेली में विराजित थी। करीब आठ दशक पहले गणपति को नवीन परिसर में विराजित किया गया। बुजुर्गों के अनुसार रियासत काल में पडित शंकर लाल ने खंदी ऊपर टीले पर स्थित हवेली में गणेशजी के प्रतिमा प्रतिष्ठित कराई थी। शंकरलाल और उनके पुत्र गैंदालाल ने के बाद सिकरौदा गांव निवासी भगवत शर्मा ने गणेशजी पूजा की थी। अब पुश्तैनी तौर पर उनके पुत्र व पौत्र गणपति की पूजा का दायित्व संभाल रहे हैं। महंत ने बताया कि रिसायतकाल की पूजा परिपाटी के तहत गणेशजी की सुबह मंगला व शाम को संध्या आरती होती है। इसके अलावा प्रति माह शुक्ल पक्ष की गणेश चतुर्थी को भजन संध्या होती है।

प्रारंभ में एक थी गणेश प्रतिमा : महंत ने बताया कि पहले गणेशजी की प्रतिमा एकल थी। 25 वर्ष पहले प्रतीकात्मक विवाह अनुष्ठान करवा गणेशजी के बाएं रिद्धी-सिद्धी की प्रतिमाएं प्रतिष्ठित कराई गई। वर्ष 2020 में मंदिर में गणेशजी के पुत्र शुभ व लाभ की प्रतिमाएं विराजित कराई गई। गणेशजी अपने वाहन मूषक पर विराजमान है।

15 वर्ष में बाहर आती है प्रतिमा : महंत ने बताया कि भगवान गणेशजी की प्रतिमा का 15 वर्ष में गणेश चतुर्थी पर गर्भग्रह से बाहर चौका लगता है। मंदिर के आंगन में सामूहिक अभिषेक कराया जाता है। 2005 और 2021 के आयोजन के बाद अब 2035 में गणपति बाहर आएंगे।