जाकी रही भावना जैसी प्रभू मूूरत देखी तिन तैसी…रामचरित मानस के बालकांड की चौपाई ने शिव मंदिर के पुजारी के मन में ऐसा घर किया कि उन्होंने परिसर में भगवान श्रीराम का दरबार विराजित करवा दिया। राजा श्री रामचंद्र के मंदिर में श्रीराम, लक्ष्मण और सीता माता के साथ भरत, शत्रुघ्न और हनुमानजी की प्रतिमाएं विराजित हैं। सराफा बाजार स्थित प्राचीन चौमुखी महादेव का मंदिर में भगवान श्रीरामचंद्र की मय दरबार राजसी स्वरूप की पूजा होती है।
मंदिर के पुजारी विपिन पंडा ने बताया कि वे मंदिर परिसर में हनुमानजी की प्रतिमा के समक्ष कई दशक से रामचरित मानस का पठन करते हैं। रामचरित मानस ग्रंथ के मुुखपृष्ठ पर प्रकाशित भगवान राम के राजसी स्वरूप की छबि मन में बस गई और हनुमानजी मंदिर कक्ष में सिंहासन पर आसीन भगवान राम व माता सीता के साथ भाई भरत, शत्रुघ्न के साथ भक्त हनुमानजी की प्रतिमाएं विराजित करने का संकल्प लिया।
इसके तहत 24 जनवरी 2022 को मंदिर में सात दिवसीय प्राण प्रतिष्ठा समारोह में भगवान श्रीराम दरबार विराजित कराया गया। मंदिर में भगवान राम व सीताजी सिंहासन पर विराजित हैं तथा लक्ष्मण व शत्रुध्न साथ खड़े हैं। वहीं भरत व हनुमानजी की प्रतिमाएं भगवान राम-सीता के चरणों में सेवक के रूप में विराजित हैं। गौरतलब है कि शहर में अधिकांश मंदिरों में भगवान रामचंद्र, लक्ष्मण व सीता के साथ खड़ी मुद्रा में स्थापित हैं। जिसे वनवासी स्वरूप में बताया गया है। सम्पूर्ण देश में अयोध्या में राम मंदिर में भगवान राम के बाल स्वरूप में श्रीरामलला के प्रतिष्ठित होने के आनंदोत्सव के तहत रामदरबार मंदिर में 22 जनवरी को राजा राम का विशेष शृंगार और महाआरती का आयोजन होगा।
कोरोना काल में दो माह में तराशी प्रतिमाएं
विपिन पंडा ने बताया कि कोरोना काल में पांबंदियों के चलते मंदिर प्रांगण में ही शिल्पकारों से राम दरबार की प्रतिमाएं तैयार कराई गई। वर्ष 2021 में शारदीय नवरात्रा में दो माह में दो शिल्पियों ने संगमरमर के शिलाखंडों से प्रतिमाओं को तराशने का कार्य पूरा किया।
सीता-राम की हैं युगल प्रतिमा
मंदिर के पुजारी ने बताया कि राजा श्रीराम के मंदिर में सात प्रतिमाएं विराजित हैं। भगवान रामचंद्र व माता सीता की सिंहासन आसीन युगल प्रतिमा विराजित हैं। जबकि लक्ष्मण, भरत, शत्रुध्न और हनुमानजी की एकल प्रतिमाएं विराजमान हैं।