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डब्ल्यूडब्ल्यूई में चमकेगा करौली का लाल… द ग्रेट खली की एकेड़मी में तैयार हो रहा राजस्थान का महाबली

करौली जिले के गांव बौल का संजय गुर्जर सीख रहा डब्ल्यूडब्ल्यूई कुश्ती के गुर

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डब्ल्यूडब्ल्यूई में चमकेगा करौली का लाल... द ग्रेट खली की एकेड़मी में तैयार हो रहा राजस्थान का महाबली

हिण्डौनसिटी. टोक्यो के पैरालंपिक में भाल फेंक में सुन्दर के ब्रॉन्ज मेडल जीतने के बाद अब करौली जिले का महाबली डब्ल्यूडब्ल्यूई (वल्र्ड रेसलिंग एंटरटेनमेंट) की खतरनाक कुश्ती की रिंग में उतरने की तैयारी कर रहा है। जिले की टोडाभीम तहसील के गांव बौल का 26 वर्षीय संजय गुर्जर हैवी वेट कुश्ती वल्र्ड चैंपियन खली की पंजाब स्थित सीडब्ल्यूई (कांटीनेंटल रेसलिंग इंटरटेनमेंट) एकेडमी में रेसलिंग के गुर सीख रहे हैं। खली से ट्रिक सीख कुश्ती में निपुण हुए संजय गुर्जर जल्द ही डब्ल्यूडब्ल्यूई रिंग में दमखम दिखाते नजर आएंगे।

करीब 3 वर्ष से खली के रेसलिंग एकेडमी में प्रशिक्षण ले रहे संजय गुर्जर का लक्ष्य डब्ल्यूडब्ल्यूई की रिंग में भारत की दमखम दिखाना है। संजय ने बताया कि गांव में स्कूली पढ़ाई के दौरान अन्य से कुछ अलग करने का जुनून उन्हें खतरनाक कुश्ती डब्ल्यूडब्ल्यूई की ओर ले आया। वे टीवी व मोबाइल पर विदेशों में होने वाले डब्ल्यूडब्ल्यूई कुश्ती को शो देखते थे। साथ ही खली की आदर्श मान उनके जैसे कुश्यिां लडऩे की ठान ली। ऐसे में कक्षा 12 की पढ़ाई के बाद संजय खली की कांटीनेंटल रेसलिंग इंटरटेनमेंट एकेडमी में जालंधर पहुंच गए। जहां प्रारंभिक प्रक्रिया से बाद उन्हें प्रवेश मिल गया। वर्ष 2018 से संजय एकेडमी में लगातार प्रशिक्षण लेने से खुद भी एक ट्रेनर बन गए हैं। उन्होंने तीन वर्ष में देश भर में कांटीनेंटल रेसलिंग इंटरटेनमेंट (सीडब्ल्यूई) के 125 से अधिक कुश्ती शो में ताल ठोकी और 110 से अधिक मैचों में विजयी रहे।

राजस्थान से हैं अकेले रेसलर-
संजय ने बताया कि खली की एकेडमी में देश भर से 40 युवा खतरनाक कुश्ती का प्रशिक्षण ले रहे हैं। इनमें 5 लडकियां भी हैं। इनमें अधिकांश हरियाण व उत्तर प्रदेश के हंै। प्रशिक्षण लेने वालों में संजय राजस्थान से अकेले रेसलर हैं। जिन्हें खली के अलावा दो अन्य विदेश कोच भी प्रशिक्षण देते हैं।

सैनिक पिता ने बढाया हौसला-
तीन भाइयों में सबसे छोटे संजय ने बताया कि डब्ल्यूडब्ल्यूई का प्रशिक्षण लेने के लिए पूर्व सैनिक पिता श्रीनारायण गुर्जर ने हौसला बढ़ाया। खतरनाक खेल को देख शुरू में मां सोमोती देवी व पत्नी पूजा सकुचाई, लेकिन अब वे खुद जीत के लिए संबल देती हैं। ढाई वर्षीय बेटी को भी पिता संजय की कुश्ती के वीडियो देखने की शौकीन हो गई है।


खली देखते हैं फाइट, सिखाते हैं टेक्निक

संजय ने बताया कि सोमवार से शुक्रवार को एकेडमी में ट्रेनिंग होती है, शनिवार को खली सभी की फाइट को देखते हैं। इसके बाद कुछ सुझाव व टेक्निक सिखाते हैं। वैसे जालंधर में होने पर खली की क्लास रोजाना हो जाती है। इसमे वे कमियों के बारे में बताते हैं। साथ ही कमजोर खिलाड़ी में प्रेरणा भर देते हैं। शनिवार की फाइट में 20 रेसलर भाग लेेते हैं। संजय वर्ष में 10 खली की एकेडमी में ही रह तैयारी करते हैं।