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किडनी रोगियों का कष्ट बरकरार, सवा साल से डायलिसिस शुरू होने का कर रहे इंतजार

हिण्डौनसिटी. किडनी रोगियों के उपचार के लिए राज्य सरकार की ओर से जिला चिकित्सालय को भेजी गई हीमो डायलिसिस मशीनें सवा वर्ष बाद भी शुरू नहीं हुई हैं। पहले सात माह तक स्टोर रूम में डिब्बाबंद रहीं डायलिसिस मशीनें अब 6 माह से ओपीडी विंग में आवंटित कक्ष में धूल फांक रही हैं। मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद चिकित्सा महकमे की सुस्त चाल से किडनी रोगियों का कष्ट कम नहीं हो रहा है।

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हिण्डौनसिटी. किडनी रोगियों के उपचार के लिए राज्य सरकार की ओर से जिला चिकित्सालय को भेजी गई हीमो डायलिसिस मशीनें सवा वर्ष बाद भी शुरू नहीं हुई हैं। पहले सात माह तक स्टोर रूम में डिब्बाबंद रहीं डायलिसिस मशीनें अब 6 माह से ओपीडी विंग में आवंटित कक्ष में धूल फांक रही हैं। मशीनें उपलब्ध होने के बावजूद चिकित्सा महकमे की सुस्त चाल से किडनी रोगियों का कष्ट कम नहीं हो रहा है। क्षेत्र के रोगियों को डायलिसिस के लिए दूसरे शहरों के चिकित्सालय जाना पड़ रहा है। दरअसल सरकार ने प्रदेश के 175 जिला चिकित्सालय, उप जिला चिकित्सालयों में डायलिसिस सुविधा शुरू करने के लिए मशीनें भिजवाई थीं। गत वर्ष फरवरी माह में राजस्थान मेडिकल सर्विसेज कॉरपोरेशन लिमिटेड ने हिण्डौन जिला चिकित्सालय में दो हीमो डायलिसिस मशीन भिजवाई थीं। उस दौरान क्षेत्र के किडनी रोगियों को स्थानीय स्तर पर डायलिसिस सुविधा मिलने की आस जगी थी, लेकिन पीपीपी मोड पर संचालन के टेण्डर प्रक्रिया के लबी खिंचने से सात माह तक 22 लाख रुपए कीमत की डायलिसिस मशीनेें स्टोर रूम में बंद रखी रही। सितबर माह में डायलिसिस सेवा शुरू करने की मंशा से मशीनों को स्टोर रूप से बाहर निकाल ओपीडी में निर्धारित कक्ष में रख दिया। क्रियान्वयन की कछुआ चाल के चलते नवबर माह में अंतिम सप्ताह में कपनी से आए डायलाइजर स्पेशलिस्ट ने दो मशीनों का ऑन करने प्रदर्शन किया था। लेकिन रीएजेंट (कंजूएबल आइटम) अन्य संसाधनों के अभाव में मशीनों का संचालन शुरू नहीं हुआ। पांच माह बाद पीपीपी मोड़ पर सेवा प्रदाता कपनी ने तकनीशियन भेजे हैं, लेकिन व्यवस्थाओं के आधी अधूरी होने से डायलिसिस सेवा के विधिवत लाभ लेने के लिए रोगियों को अभी और इंतजार करना पड़ेगा।

प्रतिदिन बाहर जाते 3-5 रोगी

अनियमित दिनचर्या व खानपान से मेडिसिन आउटडोर में किडनी रोगियों की संया बढ़ रही है। जिला चिकित्सालय के फिजीशियन डॉ. अंकुश अग्रवाल व डॉ. आशीष शर्मा ने बताया कि दवाओं से आशानुकूल राहत नहीं मिलने पर डायलिसिस कराने की सलाह दी जाती है। क्षेत्र से प्रतिदिन 3 से 5 रोगियों को डायलिसिस के लिए दूसरे शहरों को जाना पड़ता है। एक रोगी को कम से कम सप्ताह में दो बार डायलिसिस की जरुरत रहती है।

कक्ष में जगह कम, वेटिंग एरिया में रखेंगे सामान

सेवा प्रदाता कपनी के डायलिसिस तकनीशियन अजय चेतीवाल ने बताया कि ओपीडी में आवंटित कक्ष में स्थान की कमी है। ऐसे में ओपीडी में रोगियों के वेटिंग एरिया में एल्युमिनियम फ्रेम लगा कर डॉक्टर चेबर बनाए जाएंगे। साथ ही आरओ वाटर टंकी व अन्य सामान रखा जाएगा। कक्ष में दो रोगियों की एक साथ डायलिसिस होगी।

बदहाल है डायलिसिस कक्ष

ओपीडी विंग में डायलिसिस के लिए आवंटित कक्ष बदहाल स्थिति में है। गत वर्ष अतिवृष्टि के चलते सीलन से दीवारों व छत से पेंट व सीमेंट गिर रहा है। कक्ष को किड़नी रोगियों के डायलिसिस के लिए मरमत व रंगाई- पुताई से अपटेड करने से पहले ही मशीनें रख दी हैं। दो माह बाद मानसून में दीवारों में सीलन आने से फंगस संक्रमण की आशंका रहेगी।

इनका कहना है

डायलिसिस संचालन के लिए हाल ही प्रदेश स्तर पर मुबई की कपनी से एमओयू हुआ है। टेंडर धारक कपनी ने एक तकनीशियन भी भेजा है। ओपीडी में आवंटित किए कक्ष को सुसज्जित कर जल्द ही डायलिसिस सेवा शुरू की जाएगी।

डॉ. पुष्पेंद्र कुमार गुप्ता, पीएमओ जिला चिकित्सालय, हिण्डौनसिटी