जहां एक ओर प्रदेश और केन्द्र सरकार नदियों के पानी में प्रदूषिण पर रोक लगाने के लिए करोड़ों रूपए पानी की तरह बहा रही हैं, वहीं सरकारी नुमाइंदों का इस तरफ कोई ध्यान नहीं है। इसका जीवंत उदाहरण आवास विकास कॉलोनी में देखने को मिलता है। जहां दस वर्ष पूर्व लाखों रूपए से बना धोबी घाट आवंटन की राह देखते-देखते खंडहर की स्थिति में बदल गया है।
इसलिए बनाया गया था धोबी घाट
बताते चलें कि आवास विकास परिषद ने कासगंज की आवास विकास कॉलोनी की स्थापना के दौरान इसका ध्यान रखा, ताकि यहां रहने वाले लोगों के कपड़ों की गंदगी नदियों के जल को प्रदूषित नहीं कर सके। कॉलोनी में एक स्थान निर्धारित कर भूमि खरीद से लेकर निर्माण में लाखों रुपए खर्च कर धोबीघाट तैयार कराया। घाट में जल पहुंचाने और गंदे जल को सोख्ता के माध्यम से ठिकाने लगाने की भी धोबीघाट में व्यवस्था की गई थी।
दस वर्ष पूर्व बना था धोबीघाट
स्थानीय वाशिंदे रामकृपाल धोबी ने बताया कि पिछले दस वर्षों से यह धोबीघाट अभी तक चालू नहीं हो सका है। इसकी मुख्य वजह है कि अभी तक इस धोबीघाट को आवंटित ही नहीं किया गया है। स्थिति यह है कि धोबीघाट में झांडियां उग आईं हैं।
क्या कहना है जेई का
धोबीघाट संचालन के बावत आवास विकास कार्यालय में तैनात जेई जयसिंह का कहना है कि धोबीघाट का आवंटिन नहीं होने से इसका संचालन नहीं हो सका है,लेकिन आवंटन क्यों नहीं हो पा रहा, इस सवाल के जवाब पर विभागीय अधिकारी मौन रहे।