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साढ़े चार लाख की मशीन नहीं होने से बढ़ रहा दूध में मिलावट का खेल, भोपाल छोड़ प्रदेश के किसी भी जिले में नहीं मशीन

-दूध में मिलावट कम करने तीन माह पहले ही विभागीय कर्मचारियों को मशीन चलाने का प्रशिक्षण तो दिया, लेकिन मशीन नहीं होने से प्रशिक्षण बेकाम  

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Milk adulteration

Milk adulteration

कटनी. जिले में बिकने वाला दूध शुद्ध है या नही, इसकी जांच करने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग के पास साढ़े चार लाख रुपये की मिल्कोमीटर मशीन नही हैं। यह कोई एक दो साल से नही बल्कि जब से प्रदेश में खाद्य सुरक्षा विभाग का गठन हुआ है तब से इस मशीन की कमी बनी हुई हैं। जिले में मशीन नहीं होने से विभाग के अधिकारियों को दूध की शुद्धता व मिलावट की जांच करने के लिए नमूने भोपाल भेजना पड़ रहा है। वहां से रिपोर्ट आते तक दूध में मिलावट का खेल बेखौफ चलता है। दूध की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए खाद्य सुरक्षा प्रशासन विभाग के अधिकारियों को तीन माह पहले मशीन चलाने का प्रशिक्षण तो दिया गया, लेकिन मशीन नहीं होने से प्रशिक्षण भी बेकाम साबित हो रहा है। मिल्कोमीटर मशीन को लेकर स्थिति यह है कि कटनी व जबलपुर संभाग नहीं बल्कि पूरे प्रदेश में भोपाल छोड़ किसी भी जिले में यह मशीन नहीं है।


8 प्रकार की जांच
दूध की शुद्धता व मिलावट की जांच के लिए मिल्कोमीटर मशीन से प्राथमिक स्तर पर 8 प्रकार की जांच हो जाती है। इस जांच में 30 से 40 मिनट का समय लगता। मशीन नहीं होने से नमूने भोपाल भेजना पड़ रहा है, वहां से जांच रिपोर्ट आने मेंं दो महीने तक का समय लग जा रहा है। इस मशीन से दूध में यूरिया, शकर, पानी, डिटर्जेंट, स्टार्च, फेट व एनएसएफ की बड़ी आसानी से जांच हो जाती।

जिले में मशीन होने से यह होगा लाभ
दूध की जांच करने की मशीन जिले में उपलबध होने पर प्राथमिक स्तर पर जांच कर कार्रवाई में आसानी होगी। सैंपल की प्राथमिक जांच में गड़बड़ी मिलने पर त्वरित कार्रवाई की जा सकेगी।

खास-खास
- जांच में समस्या का आलम यह है कि प्राइमरी स्तर पर जांच करनेे के लिए विभाग के पास एक किट की कमीं है। कई बार विभाग के अधिकारियों द्वारा शासन से मांग करने के बाद भी किट उपलब्ध नहीं कराया जा रहा है।
- भोपाल की राज्यस्तीय प्रयोग शाला में दो माह के भीतर प्रदेशभर से 4 हजार से अधिक सैंपल पहुंच चुके हैं और उसकी सालभर में जांच करने की क्षमता 2500 से 3 हजार हैं। ऐसे में मिलावटखोरों की जांच रिपोर्ट आने और कार्रवाई करने में ज्यादा समय लगेगा।

-संभाग के किसी भी जिले में दूध की शुद्धता व मिलावट नापने के लिए मिल्कोमीटर मशीन नही है। मशीन के लिए कई बार विभाग से मांग भी गई है। प्रदेश सरकार ने 16 जिलों को मिल्कोमीटर मशीन देने की बात कही है। जिले से भी मांग की गई है।
डीके दुबे, खाद्य सुरक्षा अधिकारी।

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