अतिवृष्टि के बाद अब मजदूरों का संकट, खेतों में गिरकर खराब हो रही मिर्च, कपास चुनना बना चुनौती, किसान हार्वेस्टिंग नहीं करवा पा रहे
खरगोन. अतिवृष्टि के बाद अब किसान मजदूर नहीं मिलने से परेशान हो रहे हैं। जिले में मजदूरों का संकट खड़ा हाे गया है। मजदूर नहीं मिलने से किसान खराब फसलों को देखकर बेबस है। सबसे ज्यादा परेशानी मिर्च, कपास और सोयाबीन की हार्वेस्टिंग में आ रही है। किसानों के अनुसार इसका मुख्य कारण असमय बारिश को माना जा रहा है। अतिवृष्टि के कारण समय पर हार्वेस्टिंग नहीं हो पाई। एक साथ सभी फसलों की हार्वेस्टिंग का समय आ गया। इदरातपुरा के कृषक दिनेश पाटीदार ने बताया कि डेढ़ एकड़ में मिर्च लगाई थी। अब तक दो से तीन बार मिर्च की तुड़ाई हो जाना थी। परंतु मजदूर नहीं मिलने से एक बार भी तुड़ाई नहीं करवा पाए। करीब पांच क्विंटल मिर्च तुड़ाई नहीं होने से गिरकर नष्ट हो गई। उत्पादन में भी प्रतिकूल असर हुआ। मजदूर 10 रुपए किलो मिर्च तुड़ाई के मांग रहे हैं। जबकि इतनी मजदूरी देने पर उन्हें हानि होगी। अासनगांव के कृषक भूपेंद्र पाटीदार ने बताया कि आठ एकड़ में मिर्च व कपास फसल तैयार है। मजदूर नहीं मिलने से हार्वेस्टिंग नहीं हो रही है उन्होंने बताया कि मजदूर सोयाबीन कटाई के लिए मालवा में चले गए हैं।
दूसरे राज्यों में पलायन कर गए मजदूर
कृषि बालकृष्ण पाटीदार ने बताया कि 400 से 500 रुपए प्रतिदिन की मजदूरी देने के बावजूद मजदूर नहीं मिल पा रहे हैं। मिर्च तुड़ाई के छह से आठ रुपए और कपास चुनाई के छह से 10 रुपए प्रति किलो तक किसान मजदूरी दे रहे हैं। बावजूद इसके मजदूरों की कमी बनी हुई है। उल्लेखनीय है कि जिले में करीब दो लाख हेक्टेयर में कपास और 50 हजार हेक्टेयर में मिर्च की खेती हो रही है। दोनों फसलों में हार्वेस्टिंग के लिए मजदूरों की जरूरत होती है।
रबी सीजन की बोवनी होगी प्रभावित
अदलपुरा के कृषक निलेश पाटीदार ने बताया कि काम के अभाव में मजदूर महाराष्ट्र, गुजरात सहित अन्य राज्यों में पलायन कर गए हैं। बारिश में लगाए कपास की चुनाई लेट हो रही है। इसके कारण आगामी रबी सीजन में बोवनी लेट होने की संभावना है। प्रतिवर्ष 15 नवंबर तक तक गेहूं व चने की बाेवनी होती थी। परंतु इस वर्ष कपास व मिर्च की हार्वेस्टिंग नहीं होने से रबी सीजन की बुआई लेट होगी।