दंगे के भी बाद दर्द-28 प्रकरणों की सुनवाई पूरी, देश के पहले क्लेम ट्रिब्यूनल ने 19 लाख 74 हजार की क्षतिपूर्ति के दिए आदेश, बचाव में आरोपी पक्ष हाईकोर्ट से ले आए स्टे, इसलिए नहीं हुई वसूली
खरगोन.
शहर में पिछले साल 10 अप्रैल को रामनवमी पर हुए सांप्र्रदायिक दंगे की घटना में पीडि़तों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए शासन द्वारा क्लेम ट्रिब्यनूल गठित किया था। जिससे पीडि़तों को न्याय मिलने की उम्मीद जागी थीं। ट्रिब्यूनल ने सबूतों पर गौर फरमाते हुए 28 प्रकरणों में पीडि़तों के पक्ष में सुनाते हुए 19 लाख 47 हजार 105 रुपए के क्षतिपूर्ति के आदेश दिए। यह राशि दंगाइयों से वसूली जाना है। लेकिन बचाव में आरोपी पक्ष हाईकोर्ट से स्थगन (स्टे) ले आए। इससे वसूली नहीं हो पाई। हालांकि अभी अभी छह मामलों में ही हाईकोर्ट से स्टे मिला है। जबकि शेष मामलों में प्रक्रिया जारी है। उधर, 6 जनवरी को ट्रिब्यूनल में नए आठ प्रकरणों की सुनवाई है। इसमें चार मामलों में आवेदक पक्ष नुकसानी को लेकर ठोस सबूत और दस्तावेज नहीं पेश कर पाए। जिससे आवेदन निरस्त हो गए। जबकि चार मामलों में आरोपियों पर अर्थदंड किया गया है।
अक्टूबर में सुनाए थे छह फैसले
प्रदेश सरकार द्वारा लोक और निजी संपत्ति को हुए नुकसान की वसूली करने के लिए सुप्रीम कोर्ट की गाइड लाइन अनुसार क्लेम ट्रिब्यूनल गठित किया। ट्रिब्यूनल में सेवानिवृत्त जिला न्यायाधीश डॉ. शिवकुमार मिश्रा को अध्यक्ष और सेवानिवृत्त सचिव मध्य प्रदेश शासन प्रभात पराशर को सदस्य नियुक्त किया गया। जिनके द्वारा 14 अक्टूबर को पहला फैसला सुनाया था। जिसमें छह मामलों में आरोपी पक्ष के विरुद्ध 15 दिनों में वसूली के आदेश दिए थे। लेकिन आरोपी पक्ष हाईकोर्ट पहुंच गए और वहां से स्टे ले आए। जिससे वसूली नहीं हो सकी।
41 आवेदन हुए थे मान्य, दिसंबर में 14 फैसले
दंगे की घटना के बाद 343 लोगों द्वारा नुकसानी की बात प्रारंभिक तौर पर सामने आई थी। जिसमें 41 मामलों में ही आवेदक सबूत दे पाए। इन आवेदकों को क्लेम ट्रिबलन ने मान्य किया। लेकिन एक आवेदन वापस होने के साथ चार प्रकरण शुरुआत में ही निरस्त हो गए। 36 प्रकरणों में अभी दिसंबर में सर्वाधिक 14 मामलों की सुनवाई के साथ ट्रिब्यूनल ने क्षतिपूर्ति के आदेश दिए हैं। अभी सिर्फ आठ प्रकरण चल रहे हैं, जिनकी सुनवाई ट्रिब्यूनल में चल रही है।
समय और पैसा बर्बाद, कानूनी दाव पेंच में उलझी 'राहत
प्रभावितों को सरकार द्वारा मुआवजा दिया गया था। इसके अलावा अलग से क्षतिपूर्ति के लिए क्लेम ट्रिब्यूनल गठित हुआ था। सूत्रों के मुताबिक ट्रिब्यूनल के आदेश के 15 दिनों में प्रशासन को अनावेदक पक्ष से राशि वसूल कर पीडि़तों को दिलाना थीं। लेकिन छह मामलों में अनावेदक हाईकोर्ट से स्टे ले आए। इसी रास्ते पर दूसरे मामलों में भी स्टे मिलता है, तो पीडि़तों को न्याय के लिए इंतजार करना पड़ेगा। फिलहाल तो राहत की बात कानूनी दाव पेंच में उलझ गई है। पीडि़तों की परेशानी है कि उन्हें इतने समय में कई बार मानसिक और आर्थिक रूप परेशान होना पड़ा। जिसमें समय और पैसा दोनों बर्बाद हुआ है।
सबूतों के अभाव में दावा साबित नहीं
6 जनवरी को आए आदेश में तीन हिंदू और एक मुस्लिम पक्ष का दावा निरस्त हुआ है। इसमें अकबर पिता गफ्फार खान निवासी गोशाला मार्ग, संतोष पिता मोहनसिंह कुमावत निवासी संजय नगर और सतीश और महेश मुछाल दोनों निवासी त्रिवेणी चौक शामिल हैं, जो ट्रिब्यनूल के समक्ष अपना दावा साबित नहीं कर पाए। मालूम हो कि त्रिवेणी चौकी पर दंगे की रात उपद्रवियों द्वारा लक्ष्मी मुछाल की शादी के लिए आया सारा सामान लूटने के साथ घर में आग लगा दी थी। बाद में लक्ष्मी की शादी का पूरा खर्च और सामान राज्य सरकार द्वारा दिया गया था।
इन आवेदकों के पक्ष में फैसला
आवेदक बशीर पिता नजर अहमद 13075, मो. अहमद पिता नासीर 42900, नासीर पिता अहमद 6000 और एजाज अहमद पिता बशीर अहमद 50000 रुपए की क्षतिपूर्ति का फैसला आया है, जो अनावेदक पक्ष से वसूल कर उपरोक्त चार पीडि़तों को दिया जाना है।