भारतीयों के दिलों पर राज करने वाली चाय ने समय के साथ खुद को पूरी तरह 'री-इन्वेंट' किया है। कभी घर की रसोइयों और नुक्कड़ की टपरियों तक सीमित रहने वाली कड़क दूध-चीनी वाली चाय आज एक लग्जरी और लाइफस्टाइल स्टेटमेंट बन चुकी है। नुक्कड़ की दुकानों पर अब पारंपरिक चाय के साथ-साथ 'तंदूरी चाय', 'चॉकलेट चाय' और 'मसाला क्रश चाय' जैसे नए प्रयोग युवाओं को लुभा रहे हैं। वहीं देश के महानगरों और अब छोटे शहरों में भी 'चाय कैफे' तेजी से लोकप्रिय हुए हैं, जहां चाय की दर्जनों किस्में कॉर्पोरेट बैठकों का हिस्सा बन रही हैं। लोगों में स्वास्थ्य के प्रति सजगता बढ़ने से फिटनेस के दौर में अब ग्रीन टी, माचा टी, कैमोमाइल, हिबिस्कस (गुड़हल) और वाइट-टी, वेलनेस टी की मांग में भारी उछाल आया है। इसे अब लोग बीमारी से बचाव और 'डिटॉक्स' के रूप में अपना रहे हैं। इसी क्रम में ताइवान से आई 'बबल टी' (टैपिओका बॉल्स से बनी ठंडी चाय) ने भारतीय युवाओं के बीच एक नया बाजार खड़ा कर दिया है।