कुसमुंडा की मशीन ने काम करना बंद कर दिया है। गेवरा की मशीन अफसरों की सेवा में लगी है। गेवरा की डस्ट स्वीपिंग मशीन तभी बाहर निकलती है, जब कोयला मंत्रालय या कोल इंडिया से कोई अधिकारी खदान का दौरा करने पहुंचते हैं। प्रबंधन इस मशीन को उसी रास्ते में चलाता है, जहां से अफसर और उनके अधीनस्थ गुजरने वाले होते हैं। इसके बाद यह मशीन लोगों की नजर से ओझल हो जाती है। कभी सड़क पर दिखाई नहीं देती है।