कोटा. मेडिकल कॉलेज के संबद्ध एमबीएस अस्पताल के डॉक्टरों ने दस माह की बालिका के सिर के पीछे सिर के बराबर की गांठ का सफल ऑपरेशन कर नया जीवन दिया है। डॉक्टरों का कहना है कि यह काफी जटिल और रिस्की था। इस बीमारी को ओकसिपीटल एनकेफेलोसील कहते हैं। ऐसे केस बहुत दुर्लभ होते हैं। पांच हजार बर्थ में एक केस रिपोर्ट होता है।
ऐसे मरीजों में अन्य जन्मजात विकृतियां जैसे हृदय, किडनी, आंतों की विकृति, वेक्टर्ल सिंड्रोम होने के चांस ज्यादा होते हैं।न्यूरोसर्जन डॉ. एसएन गौतम ने बताया कि 21 अगस्त को डीसीएम निवासी बालिका के उसे लेकर परिजन अस्पताल में आए थे।
दस माह की बालिका के सिर के पीछे उसके सिर के बराबर की गांठ थी। उसे शिशु रोग विशेषज्ञ को दिखाया। उसे न्यूरो सर्जरी विभाग में भेजा गया। बालिका की जांचें की गईं। जांच के बाद बालिका को भर्ती कर लिया गया। चार डॉक्टरों की टीम ने 23 अगस्त को ऑपरेशन किया। ऑपरेशन के दौरान हाइपोथर्मिया के रिस्क के चलते मासूम का टेंपरेचर मेंटेन रखा गया। गांठ बड़ी होने की वजह से इंट्राक्रेनियल प्रेशर बहुत ज्यादा बढ़ा हुआ था। जिसको कम करने के लिए पहले वीपी शंट किया गया।
जिसमें सिर से पेट तक नली डालकर प्रेशर कम कर गांठ का सफल ऑपरेशन किया गया। बालिका अब बिल्कुल ठीक है। डॉ. गौतम, डॉ. बनेश जैन, डॉ. अर्चना त्रिपाठी, डॉ. हंसराज चरण ऑपरेशन टीम में शामिल रहे। ऑपरेशन तीन घंटे तक चला। बालिका की गांठ को अलग कर दिया गया। दस दिन तक निगरानी में रखने के बाद अब उसे छुट्टी देने की तैयारी है।
ब्रेन का आवरण निकलने लगता है बाहर
डॉ.गौतम ने बताया कि छोटे बच्चों में ब्रेन की झिल्ली और आवरण का हड्डी में से बाहर निकल जाना ही गांठ का कारण है । दरअसल, छोटे बच्चों के दिमाग की हड्डी में पिछली तरफ गैप होता है। समय के साथ-साथ यह बंद होता जाता है। जन्मजाम विकृति होने के चलते इस गैप में से दिमाग का आवरण और झिल्ली बाहर निकलने लगती है और गैप को बढ़ा देती है। इसके साथ ही फ्लूड भी निकल कर दूसरी तरफ भरने लग जाता है। जिसकी वजह से यह गांठ बनती है। जन्म से ही यह बीमारी होती है।
धीरे-धीरे गांठ बड़ी होने लगती है। अगर समय पर इसका इलाज नहीं करवाने पर गांठ से रिसाव शुरू हो जाता है। जिससे मौत हो सकती है। गांठ अंदर की तरफ बढ़ने लगे तो भी नुकसानदायक होती है। दोनों ही स्थिति में मरीज के जीवन को खतरा होता है। इससे विकलांगता भी हो सकती है।
जन्म के एक महीने बाद ही बनने लगी गांठ
डीसीएम निवासी सुमन ने बताया कि उनकी बेटी के जन्म के महीने भर बाद दिमाग के पिछले हिस्से में गांठ होने का पता चला। दो महीने बाद जब गांठ बढ़ने लगी तो हमने कई डॉक्टरों को दिखाया। दवाइयां भी चली लेकिन गांठ बढ़ती चली गई।
क्यों होती है यह बीमारी
डॉ. एसएन गौतम ने बताया कि ओकसिपीटल एनकेफेलोसील, स्पाइना बाईफिडा बीमारी का ही एक रूप है। स्पाइना बाईफिडा होने के कई कारण हो सकते हैं। जिनमें मुख्य रूप से आनुवंशिक कमी ,गर्भावस्था में मां का रेडीएशन के सम्पर्क में आना,गर्भावस्था में फोलिक ऐसिड की कमी (विटामिन बी 9),अधिक उम्र में गर्भ धारण एवं गर्भावस्था में हानिकारक दवाओं का सेवन इसका कारण बनता है।