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आवासन मण्डल : योजनाओं का काम बंद, सरकार को सौंपा संपत्तियों का ब्यौरा

मुख्यमंत्री की नाराजगी से आवासन मण्डल का भविष्य अधरझूल में है। नए कार्यों की चल रही फाइलों को आलमारियों में बंद कर दिया गया है और पुराने चल रहे कार्य भी ठप हैं। मण्डल अधिकारियों का फिलहाल पूरा ध्यान खाली पड़े करीब 18 हजार मकानों को बेचने पर है।

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कोटा

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raghuveer singh

Jul 20, 2016

मुख्यमंत्री की नाराजगी से आवासन मण्डल का भविष्य अधरझूल में है। नए कार्यों की चल रही फाइलों को आलमारियों में बंद कर दिया गया है और पुराने चल रहे कार्य भी ठप हैं। मण्डल अधिकारियों का फिलहाल पूरा ध्यान खाली पड़े करीब 18 हजार मकानों को बेचने पर है।

कामकाज बंद होने से अधिकारियों के पास भी काम नाममात्र रह गया है। ऐसे में मण्डल मुख्यालय से लेकर अन्य कार्यालयों में कर्मचारी दिनभर मण्डल के भविष्य को लेकर चर्चा करते नजर आ रहे हैं। नई योजनाओं के प्रोजेक्ट आलमारियों में बंद होने से कार्यालय में रहने वाली चहल-पहल भी कम हो गई है।

उधर, राज्य सरकार की ओर से मांगे जाने पर मण्डल अधिकारियों ने उपलब्ध संसाधन, कर्मचारी और संपत्तियों को ब्यौरा भेज दिया है। बताया जा रहा है कि इसके आधार पर मण्डल की ओर से मुख्यमंत्री को पावर पॉइंट प्रजेन्टेशन देने की तैयारी कर ली गई है। लेकिन मुख्यमंत्री से कब समय मिलेगा और इसे देखने के बाद मुख्यमंत्री क्या निर्णय लेंगी, इसे लेकर मण्डल अधिकारियों में भय भी है।

निवाई सहित कई योजनाओं को रद्द कर राशि लौटाने की तैयारी

नए कामकाज बंद होने से टोंक जिले के निवाई में लाई जा रही आवासीय योजना को भी रद्द कर आवंटियों को राशि लौटाने को लेकर लगभग निर्णय हो चुका है। इस योजना में करीब डेढ़ सौ आवासों के लिए सात हजार लोगों ने आवेदन किए थे। लॉटरी के जरिए सफल आवेदकों का चयन हो चुका है। मण्डल अन्य पुरानी योजनाओं के पंजीकृत आवेदकों को भी मकान बनाकर देने के बजाय राशि लौटाने की तैयारी कर रहा है। नए प्रोजेक्ट बंद होने से मण्डल अधिकारियों के पास भी काम नाममात्र का रह गया है। फाइलों की आवक-जावक भी दस फीसदी है।

मासिक खर्च 7 करोड़, सम्पत्ति हजारों करोड़ की

आवासन मण्डल की राजस्थान में हजारों करोड़ रुपए की सम्पत्ति पड़ी है। जबकि मासिक वेतन भत्तों पर खर्च 7 करोड़ रुपए प्रतिमाह हो रहा है। राज्य के तमाम शहरों में 18 हजार मकान खाली पड़े हैं। पहले आवंटित किए जा चुके मकानों की हर माह करोड़ों रुपए किस्त आ रही है। प्रदेश के कई शहरों में भी आवासीय और व्यावसायिक जमीनें खाली पड़ी है। राजधानी जयपुर के मानसरोवर, प्रताप नगर और इंदिरा गांधी नगर में हजारों करोड़ की सम्पत्तियां पड़ी है।

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