
आरएसी ग्राउण्ड : 400 बीघा पथरीली जमीन में तीन साल में लगाए पचास हजार पौधे
जयप्रकाश सिंह
रावतभाटा रोड पर करीब चार सौ बीघा में फैले आरएसी परेड ग्राउण्ड और आवासीय कॉलोनी में चारों तरफ पथरीली जमीन थी। चट्टानों में पानी के लिए बोरिंग करना बहुत कठिन था, लेकिन जवानों ने यहां से गुजर रहे तीन नालों के पानी से ही तीन साल में करीब 50 हजार पेड़-पौधों उगाकर जंगल का रूप दे दिया। आज यहां चारों तरफ हरियाली है, वहीं कई तरह के पक्षियों ने बसेरा बनाया हैं। नए कोटा के अन्य हिस्सों की तुलना में यहां तापमान घटा है। प्रदूषण भी कम हैं।
तीन साल में हुआ परिवर्तन
आरपीएस पवन कुमार जैन ने वर्ष 2019 में कोटा में आरएसी बटालियन में डिप्टी कमांडेण्ट पद संभाला। उस समय भीतरिया कुण्ड शिवपुरा के सामने आरएसी परेड ग्राउण्ड और आवासीय कॉलोनी में खाली मैदान था। जैन ने जवानों के साथ यहां हरियाली विकसित करने की ठानी। मैदान पठारी होने के कारण भूगर्भ जल की समस्या है। सौ फीट से ज्यादा बोरिंग के बावजूद पानी नहीं निकला। ऐसे में पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए पानी की बड़ी समस्या थी।
पानी की प्रयोगशाला में करवाई जांच
आरएसी परेड ग्राउण्ड से तीन नाले गुजर रहे हैं, जिनमें आसपास की कॉलोनियों का गंदा पानी बहता है। इन नालों के पानी की प्रयोगशाला में जांच करवाई गई तो यह पेड़-पौधों की सिंचाई के लिए फायदेमंद पाया गया। जुलाई 2019 में राजस्थान पत्रिका के हरयालो राजस्थान अभियान के तहत यहां सघन पौधरोपण शुरू किया। मानसून में यहां 15 हजार पौधे लगाए गए। नालों के पानी से सिंचाई की गई। यहां स्थित दो तालाबों की खुदाई कर उसमें पानी इकट्ठा किया गया। पानी मिलने से कुछ ही महीनों में पौधे चल निकले। इसके बाद से लगातार यहां पौधे लगाने का कार्य जारी है। अब तक यहां 50 हजार पौधे लगाए जा चुके हैं।
150 डम्पर उपजाऊ मिट्टी
विभिन्न संस्थाओं के सहयोग से पूरे परिसर में करीब 150 डम्पर उपजाऊ मिट्टी डाली गई है। इसके साथ ही आरएसी परिसर में रह रहे करीब 250 परिवारों ने भी अपने घरों के सामने पौधों की सार संभाल की जिम्मेदारी ली।
21 वाटिकाएं विकसित
आरएसी परिसर में 21 वाटिकाओं के रूप में हरियाली विकसित की गई। बड़ी संख्या पीपल, बड़, शीशम, सागवान, नीम, करंज, आम, इमली, जामुन, आंवला, नींबू, संतरा समेत कई फलदार पेड़ बन चुके हैं। यहां हर्बल वाटिका में सौ से अधिक औषधीय प्रजातियों के पौधे लगाए हैं।
चट्टानों के अंदर हरियाली लाना चुनौतीपूर्ण था, लेकिन अधिकारियों के मार्गदर्शन और जुनून से हम इसे ऑक्सीजोन के रूप में विकसित कर पाए। तीन साल में यहां 50 हजार पौधे लग चुके हैं। इस साल दस हजार पौधे लगाने का लक्ष्य रखा है।
पवन कुमार जैन, डिप्टी कमांडेंट, आरएसी कोटा
Published on:
05 Aug 2022 12:10 am
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