
कोटा .
कोटा विश्वविद्यालय में वर्ष 2012 से लेकर 2014 के बीच शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्तियों में हुई अनियमितताओं का जिन्न एक बार फिर बोतल से बाहर निकल आया है। दीक्षांत समारोह के दौरान राज्यपाल ने स्वीकार किया कि तत्कालीन कुलपति के कार्यकाल में हुई भर्तियों में अनियमितताएं हुईं थी। इसमें शामिल आरोपितों पर कार्रवाई के लिए वह सरकार से पूछेंगे कि उन्हें कितना समय चाहिए।
फैसला तो राजभवन को ही करना है
बहू-बेटों की भर्ती करने के मामले में एक साल से कार्रवाई राजभवन में ही लंबित पड़ी है। विधानसभा के निर्देश पर राजस्थान विवि के कुलपति की अध्यक्षता में गठित जांच समिति ने 17 मार्च 2016 तो अपनी जांच रिपोर्ट सरकार को सौंप दी थी। जिस पर कोटा विवि से तथ्यात्मक रिपोर्ट प्राप्त करने के बाद उच्च शिक्षा मंत्री ने विभागीय समिति गठित कर इस रिपोर्ट का पुन: परीक्षण कराया।
जिसके बाद सरकार इस नतीजे पर पहुंची कि वर्ष 2012 से लेकर 2014 के बीच हुई शिक्षकों और कर्मचारियों की भर्ती में अनियमितताएं हुई थीं। नतीजतन, विश्वविद्यालय नियमावली के अनुसार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने के लिए उच्च शिक्षा मंत्री ने 27 मार्च 2017 को राजभवन को पत्र भेजा था। पत्र के साथ जांच रिपोर्ट और विभाग की तथ्यात्मक रिपोर्ट भी भेजी गई थी, लेकिन राजभवन से एक साल बाद भी इस मामले में कार्रवाई करने के आदेश जारी नहीं हो सके हैं।
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एसीबी कर रही है जांच
इतना ही नहीं उच्च शिक्षा विभाग ने 31 मार्च 2017 और 19 सितंबर 2017 को एसीबी को पत्र लिखकर कोटा विश्वविद्यालय में वर्ष 2012 से लेकर वर्ष 2014 तक भर्ती हुए शिक्षकों, कर्मचारियों, प्रबंध मंडल के सदस्यों, तत्कालीन कुलपति प्रो. मधुसूदन शर्मा और चयन समिति के प्रमुखों के खिलाफ अभियोग पंजीकृत कर जांच करने के निर्देश दिए थे। यह जांच भी अभी चल रही है।
कोटा विश्वविद्यालय कुलपति प्रो. पीके दशोरा वर्ष 2012 से वर्ष 2014 की भर्तियों में हुई अनियमितताओं में किसी तरह की कार्रवाई करने के लिए राजभवन से अभी कोई आदेश नहीं मिला है। मामले की एसीबी भी जांच कर रही है।
Published on:
05 Apr 2018 02:06 pm
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