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ताकली बांध में पानी का भराव रोकेगा अवैध बजरी परिवहन

मिट्टी परिवहन कार्य जारीनिजी वाहन व मशीनें लगाकर कर रहे मिट्टी की खुदाई

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ताकली बांध में पानी का भराव रोकेगा अवैध बजरी परिवहन

ताकली बांध में पानी का भराव रोकेगा अवैध बजरी परिवहन

कोटा. जिले के रामगंजमंडी क्षेत्र के ताकली बांध में इस साल बरसाती पानी का भराव होने के साथ प्रतिवर्ष बरसात के बाद नदी से अवैध रूप से होने वाला बजरी परिवहन रुकने से खनिज विभाग को अवैध खनन पर होने वाली कार्यवाही से मिलने वाली वसूली समाप्त हो जाएगी तो कुछ विभागों के अवैध नजराने पर इसका प्रतिकूल असर पड़ेगा।
रामगंजमंडी क्षेत्र में अवैध रूप से बजरी परिवहन का धंधा सालों से फल फूल रहा है। अवैध बजरी परिवहन के इस खेल में आधा दर्जन से अधिक कामगारों की मौत भी हुई है, जो क्षेत्र के विभिन्न पुलिस थानों में पंजीकृत हैं। ताकली बांध का निर्माण भानपुरा तहसील के गांवों के साथ गांधी सागर के जंगल से बहकर आने वाले पानी की जबरदस्त आवक को देखते हुए किया गया है। नदी नालों से बहकर आने वाले इस पानी के बहाव के साथ बजरी भी आती है। नदी नाले जब सूख जाते हैं तो रिछड़िया तमोलिया, डाकिया गांव वाले नदी के क्षेत्र में अवैध रूप से बजरी की खुदाई का खेल खूब चलाते थे। प्रतिदिन दर्जनों ट्रैक्टर बजरी लेकर खैराबाद की तरफ दौड़ते दिखाई देते थे, जिसके कारण दो से तीन बार इन ट्रैक्टरों की चपेट में आकर लोग चोटग्रस्त भी हुए तो कुछ को जान तक गंवानी पड़ी थी। बजरी के अवैध खनन से होने वाले मुनाफे ने स्थानीय ग्रामीणों को भी इससे जोड़ा, जिन्होंने रोजगार बनाकर यह कार्य किया। लेकिन जब खनिज विभाग ने इन्हें पकड़ा तो उन्हें भारी जुर्माना की अदायगी उपरान्त इसे छोड़ना पड़ा तो कुछ वाहन मालिकों ने मासिक नजराना फिक्स करके कार्य को बदस्तूर जारी रखा। ताकली बांध का कार्य इस साल पूरा होने से जलभराव होने पर बरसों से बजरी परिवहन का चलने वाला यह खेल जलभराव होने से बंद हो जाएगा। ताकली बांध वाले क्षेत्र में तो बजरी खनन पर अंकुश लग जाएगा लेकिन रामगंजमंडी तहसील में अभी कुछ ऐसी नदिया हैं जहां अवैध बजरी परिवहन जारी रहेगा।
बजरी रुकी अब मिट्टी का परिवहन
रामगंजमंडी क्षेत्र के ताकली बांध वाले क्षेत्र में बांध के निर्माण से अवैध बजरी परिवहन पर तो अंकुश लगा है लेकिन अवैध रूप से मिट्टी का परिवहन कार्य बदस्तूर जारी है। हालत ऐसे है कि मिट्टी बेचने की सरकार से तरफ अनुमति नहीं होने के उपरान्त भी कुछ लोग निजी वाहन व मशीनें लगाकर मिट्टी की खुदाई करके उसे बेचने का कार्य कर रहे हैं। रिछड़िया की पठारी वाले क्षेत्र में अवैध रूप से खनन इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है। जितने एरिया में यह पठारी खुदी है उसका परिवहन करके मिट्टी का उपयोग किस कार्य में कहा हुआ इसकी जांच करने की फुरसत किसी विभाग व प्रशासन को नहीं है। सरकारी कामकाज के लिए जमीन खुदाई की स्वीकृति दी उसके अनुरूप कितनी मिट्टी खुदी व निर्माण करने वाली एजेंसी के कार्य में कितनी मिट्टी का उपयोग हुआ इसका आकलन भी नहीं किया जा रहा। पिछले दिनों शिकायत होने पर एक सरकारी कार्य करने वाले संवेदक के खिलाफ मौके पर साधन पकड़कर अवैध मिट्टी परिवहन का केस बनाया। जुर्माना वसूलकर सारे मामले का पटाक्षेप कर दिया जबकि यह नहीं देखा गया कि संवेदक की तरफ से किए जाने वाले कार्य में कितनी मिट्टी का उपयोग किया। भारत माला प्रोजेक्ट में निर्मित होने वाले कार्य में विभाग की तरफ से जारी हुई एसटीपी के अनुरूप कितनी खुदाई हुई कितनी निर्माण में खपत हुई, इसका मूल्यांकन भी नहीं किया जा रहा।

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