
र्वती-कालीसिंध-चंबल ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (पीकेसी-ईआरसीपी) का कालीसिंध नदी पर पहला डेम नौनेरा तैयार है। इन दिनों कालीसिंध नदी उफान पर है। बांध के गेटों को छूकर पानी निकल रहा है, लेकिन इस मानसून बांध में पानी का भण्डारण नहीं किया जाएगा। क्योंकि बांध के ऊपरी क्षेत्र में राजस्थान और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाले हाईलेवल ब्रिज का काम पूरा नहीं हुआ है। इस ब्रिज का कार्य अक्टूबर तक किया जाना है।
कालीसिंध नदी उफान पर, लेकिन इस बार नहीं भरेगा नौनेरा बांध
र्वती-कालीसिंध-चंबल ईस्टर्न राजस्थान कैनाल प्रोजेक्ट (पीकेसी-ईआरसीपी) का कालीसिंध नदी पर पहला डेम नौनेरा तैयार है। इन दिनों कालीसिंध नदी उफान पर है। बांध के गेटों को छूकर पानी निकल रहा है, लेकिन इस मानसून बांध में पानी का भण्डारण नहीं किया जाएगा। क्योंकि बांध के ऊपरी क्षेत्र में राजस्थान और मध्यप्रदेश को जोड़ने वाले हाईलेवल ब्रिज का काम पूरा नहीं हुआ है। इस ब्रिज का कार्य अक्टूबर तक किया जाना है। इस कारण बांध का जल स्तर डेथ लेवल पर ही रखा जाएगा। इस बांध से प्रदेश के 21 जिलों के 158 बांध-तालाब और अन्य जल स्रोतों में पानी भरा जाना प्रस्तावित है।
डेम पर 27 गेट बनाए गए
जल संसाधन विभाग के अधिकारी मौके पर रहकर बांध की िस्थति देख रहे हैं। डेम पर 27 गेट बनाए गए हैं। साथ ही दो स्लूज गेट भी हैं। थोड़ा-थोड़ा पानी रोककर गेटों की टेस्टिंग की जा रही है। यह डेम स्काडा ऑपरेटिंग सिस्टम से काम करेगा और इसके गेट को रिमोट के जरिए ऑपरेट किया जाएगा। इनका भी परीक्षण किया जा रहा है।
इंटकवैल का काम चल रहा
डेम नौनेरा का निर्माण 14 अक्टूबर 2018 में शुरू हुआ था। डेम पर अब तक 955 करोड़ रुपए खर्च हो चुके हैं, जबकि परियोजना की लागत 1316 करोड़ की है। बांध का कार्य लगभग पूरा हो चुका है। जलदाय विभाग की ओर से इंटकवैल बनाया जा रहा है। बांध की क्षमता 226 मिलियन क्यूबिक मीटर है।
जलभराव की मुख्य बाधा
जल संसाधन विभाग के अनुसार, बैराज के डूब क्षेत्र में आ रही बड़ोद पुलिया के स्थान पर 92 करोड़ की लागत से उच्च स्तरीय पुल का निर्माण पीडब्ल्यूडी की ओर से 12 अप्रेल 2023 से किया जा रहा है। कार्य पूर्ण करने की संभावित तिथि 20 अक्टूबर 2024 है। अत: इस अवधि तक बैराज में जल भराव किया जाना संभव नहीं है।
3112 हेक्टेयर में डैम और कैचमेंट एरिया
बांध के निर्माण के दौरान 148.15 करोड़ रुपए का मुआवजा बांटा गया है, इस डेम और इसका कैचमेंट एरिया 3112 हेक्टेयर में है, जिसमें 656 हेक्टेयर वन भूमि थी. वहीं, 495 हेक्टेयर निजी भूमि थी. इनका अधिग्रहण किया गया है, जिसके लिए 148.15 करोड़ की राशि बतौर मुआवजा दी गई है. जबकि वन भूमि के लिए 118 करोड़ रुपए दिए गए।
Published on:
06 Aug 2024 10:51 pm

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