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Rajasthan News: राजस्थान में यहां होती है ‘हरे सोने’ की खेती, किसान हो रहे हैं मालामाल, जानिए कैसे

Rajasthan News: बांस को हरा सोना भी कहते हैं। अन्य फसलों की तरह बांस के खेत को बार-बार तैयार करने की नौबत नहीं आती है। इसे किसी खास देखरेख की भी जरूरत नहीं पड़ती। ये बहुत कम लागत में शानदार कमाई देता है।

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कोटा

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Kirti Verma

Dec 08, 2023

bamboo

हाबुलाल शर्मा
Rajasthan News: बांस को हरा सोना भी कहते हैं। अन्य फसलों की तरह बांस के खेत को बार-बार तैयार करने की नौबत नहीं आती है। इसे किसी खास देखरेख की भी जरूरत नहीं पड़ती। ये बहुत कम लागत में शानदार कमाई देता है। इसी का परिणाम है कि हाड़ौती सम्भाग में प्रगतिशील किसान व व्यापारी समूह बांस की खेती के प्रति रूझान बढ़ा है। अभी कोटा, झालावाड़ व बिजोलिया में बांस की खेती की जा रही है। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार हाड़ौती की जलवायु बांस की खेती के लिए अनुकूल है।

6 हजार से ज्यादा पौधे
कोटा निवासी सुधाकर बहेडिय़ा ने बताया कि 4 साल पहले कोटा के निकट रामनगर में डेढ एकड़ में बांस के 1500 पौधे (बम्बुसा प्रजाति) 4 साल पहले लगाए थे। इसमें से 1200 पौधे चल गए है। एक ही पौधे में आठ से दस बांस के गुच्छे तैयार हो गए। अब इनकी कटाई होगी। इसके बाद फिर से इनके नए गुच्छे तैयार हो जाएंगे। इसी तरह कोटा निवासी तरुण मोदी ने जिले के ही खजूरी गांव में चार साल पहले करीब 25 बीघा में 5 हजार से ज्यादा बांस के पौधे लगाए थे जो अब कटाई के करीब है।

खेत में तापमान 10 से 15 डिग्री कम रहता है
उन्होंने बताया कि बांस के खेत का तापमान भी सामान्य तापमान से 10 से 15 डिग्री कम रहता है। बांस की पत्तियां गिरकर खेत में खाद में परिवर्तित हो जाती है। शुरूआत में दो साल तक छोटे पौधे रहने पर ड्रीप से सिंचाई की जाती है इसके बाद ड्रीप सिस्टम हटाकर धोरे बनाकर पानी दिया जाता है।

किसी भी मौसम में खराब नहीं होता
यही नहीं बांस की फसल की एक खासियत यह है कि यह किसी भी मौसम में खराब नहीं होता। बांस की फसल को एक बार लगाकर कई साल तक इससे उपज ली जा सकती है। बांस की रोपाई के बाद तीसरे या चौथे साल में फसल मिलने लग जाती है।

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सालाना 25 प्रतिशत बढ़ती है पैदावार
कटाई के पहले साल प्रति एकड़ 40 से 50 टन वजन के बांस की पैदावार मिलती है। ज्यों-ज्यों बांस की उम्र बढ़ती है उसका आकार और वजन भी सालाना 25 प्रतिशत की दर से बढ़ता जाता है। तीसरे साल की कटाई तक पैदावार 100 टन के आसपास तक पहुंच जाती है। साथ ही बांस के साथ अन्य फसलों की उपज भी ली जा सकती है।

कोटा जिले के अलावा झालावाड़ में भी किसान कर रहे बांस की खेती
सुधाकर ने बताया कि कोटा जिले के अलावा झालावाड़ में भी बांस की खेती की जाती है, लेकिन वहां खेती की मेड़ पर बांस के पौधे लगाते है जो उन्हीं के काम आ जा जाते है। ये किसान इन बांस को अपने संतरे व नीबू के बगीचे में पेड़ों के नीचे लगाने के काम में ले लेते है। इसी तरह बिजौलिया में भी किसान बांस की खेती कर रहे हैं। साथ ही बांस तना ही नहीं पत्तियां भी औषधीय गुणों से भरपूर होने से आयुर्वेदिक दवा के काम भी आता है।

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