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विश्व एंकिलोजिंग स्पोंडिलिटिस दिवस: सैर व हल्के व्यायाम से मिलेगी एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में राहत

दुनिया में करीब 1.4 प्रतिशत लोग एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (एएस) बीमारी से पीड़ित हैं। यह एक इंफ्लेमेटरी और ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर के जोड़ों में सूजन आ जाती है। यह मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है। 6 मई को विश्व एंकिलोजिंग स्पोंडिलिटिस दिवस मनाया जाता है।  

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कोटा

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Abhishek Gupta

May 06, 2023

विश्व एंकिलोजिंग स्पोंडिलिटिस दिवस: सैर व हल्के व्यायाम से मिलेगी एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में राहत

विश्व एंकिलोजिंग स्पोंडिलिटिस दिवस: सैर व हल्के व्यायाम से मिलेगी एंकिलॉजिंग स्पॉन्डिलाइटिस में राहत

कोटा. दुनिया में करीब 1.4 प्रतिशत लोग एंकिलोजिंग स्पॉन्डिलाइटिस (एएस) बीमारी से पीड़ित हैं। यह एक इंफ्लेमेटरी और ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर के जोड़ों में सूजन आ जाती है। यह मुख्य रूप से रीढ़ की हड्डी को प्रभावित करती है। 6 मई को विश्व एंकिलोजिंग स्पोंडिलिटिस दिवस मनाया जाता है। न्यूरो सर्जन डॉ. एसएन गौतम ने बताया कि इस बीमारी में यदि सही समय पर इलाज शुरू ना करें तो स्पाइन बांस की तरह सीधा और कड़क हो जाता है। जिससे सांस लेने में भी तकलीफ हो सकती है। कमर, कूल्हों व नितंबों में दर्द शुरू हो जाता है।

यह बीमारी पूरे शरीर को प्रभावित कर सकती है। इस बीमारी के लक्षणों में दर्द और जकड़न है, जो गर्दन से नीचे की ओर पीठ के निचले हिस्से तक जाती है। इस स्थिति से पीड़ित लोगों को चलने में कठिनाई होती है, लेकिन शरीर की कठोरता को दूर करने के लिए हर दिन हल्का व्यायाम व सैर करना आवश्यक है।

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लक्षण

सूजन, जकड़न, या अन्य जोड़ों में दर्द

त्वचा पर चकते

वजन कम होना या भूख न लगना

गहरी सांस लेने में परेशानी

दृष्टि में परिवर्तन या आंखों में दर्द

थकान पेट दर्द

कारण

आनुवंशिक कारक, जैसे एचएलए-बी 27

प्रदूषण, संक्रमण, विषाक्त पदार्थों के साथ संपर्क ,पर्यावरणीय जोखिम

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अगर ये सब करेंगे तो बच सकते हैं

उपचार का पालन: एक बार जब रोगी को स्थिति का पता चल जाता है तो सही उपचार से दर्द को काफी हद तक कम किया जा सकता है। उपचार से रोग के बढ़ने की गति को धीमा किया जा सकता है। दवाएं रीढ़ में सूजन को रोकने में मदद करती हैं।

जीवनशैली में बदलाव: एक ही जगह पर लंबे वक्त पर बैठे नहीं रहें, काम के बीच छोटे-छोटे ब्रेक लेते रहें। नियमित व्यायाम जैसे तैराकी, योग, दौड़ना, हल्के वजन के साथ एक्सरसाइज फायदेमंद रहती है, जो हड्डियों और ज्वॉइंट्स को एक्टिव रखें। सोने के लिए अच्छे गद्दों का इस्तेमाल करना, दर्द वाले स्थान व शरीर के हिस्सों पर गर्म और ठण्डी सिकाई करें।

सही खानपान : विटामिन डी, ई, ओमेगा 3 फैटी एसिड और कैल्शियम से भरपूर खाद्य पदार्थों का सेवन हड्डियों को मजबूत बनाने और प्रतिरक्षा को बढ़ावा देने में मदद करता है। धूम्रपान और शराब के सेवन से बचना जरूरी है।

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