12 फ़रवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

Ajay Rai Row: क्या इन 4 वजहों से बृजलाल खाबरी को अध्यक्ष पद से हटाया गया?

एक साल पूरे होने के पहले ही क्यों कांग्रेस ने बृजलाल खाबरी को यूपी कांग्रेस अध्यक्ष पद से हटा दिया? इसके पीछे अंबेडकर के नारे समेत 4 कारण नजर आते हैं।

3 min read
Google source verification

लखनऊ

image

Janardan Pandey

Aug 18, 2023

brijlal_khabari_1.jpeg

बृजलाल खाबरी बीच में अंबेडकर की फोटो के साथ।

कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व ने उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष को बदल कर लोकसभा की तैयारियों का आगाज कर दिया है। कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश की कमान अब पांच बार के विधायक रहे अजय राय के हाथों में सौपी है। इससे पहले इस पद पर बृजलाल खाबरी तैनात थे। उन्हें पिछले साल 2 अक्टूबर को प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन एक साल पूरे होने के पहले ही उनको पद से मुक्त कर दिया गया। उन्हें किन कारणों से हटाया गया इस पर चर्चा होना लाजमी है। हालांकि कुछ लोग ये कह रहे की संगठन चलाने का तजुर्बा नहीं था इसलिए संभाल नहीं पाए। जो सही नहीं है क्योंकि वो इससे पहले दिल्ली में संगठन के ही हिस्सा रहे हैं। तो आइये जानते हैं, बृजलाल खाबरी को किन वजहों से अध्यक्ष पद से हटाया गया।

पहली वजह: बड़बोलेपन की वजह से कुर्सी गंवानी पड़ी

आज से कुछ महीने पहले चर्चा शुरू हो गई थी की उत्तर प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष बृजलाल खाबरी आज़ादी के साथ काम करना चाहते हैं। लेकिन प्रियंका गांधी के साथ मौजूद कुछ लोग उन पर लगातार दबाव बना रहे हैं। ऐसे में बृजलाल खाबरी एक दिन राष्ट्रीय अध्यक्ष खड़गे को अपना रिपोर्ट कार्ड दिखाने पहुंच गए। इस दौरान खाबरी बड़बोलेपन में ये बोल गए की 'पार्टी को विधानसभा में 2।33% वोट मिला था, सब कर्नाटक चुनाव में व्यस्त थे मैंने अकेले मेहनत की निकाय चुनाव में 10% तक आ गया'। खाबरी के इस वक्तव्य का ऊपर गलत संदेश गया। माना जाने लगा की खाबरी ये कहना चाह रहे थे की प्रियंका के प्रचार के बावजूद विधानसभा में बुरी हार देखनी पड़ी। जबकि निकाय चुनाव में कोई शीर्ष नेतृत्व नहीं आया फिर भी उन्हों परसेंट में इजाफा करके दिखाया।

दूसरी वजह: बिना सूचना के कार्यवाहक जिला अध्यक्ष की नियुक्ति

अध्यक्ष बृजलाल खाबरी ने 26 मई को एक पत्र जारी कर अजय सोनकर को जौनपुर का कार्यवाहक जिलाध्यक्ष बना दिया था। अजय सोनकर को कार्यवाहक जिला अध्यक्ष नियुक्त करने से पहले वहां के जिलाध्यक्ष फैसल हसन तबरेज को कोई सूचना नहीं दी गई, न ही उन्हें हटाने का कोई पत्र जारी किया गया। फैसल हसन तबरेज पुराने कांग्रेसी हैं। एनएसयूआई में रहे। यूथ कांग्रेस में रहे और वर्तमान में जिला अध्यक्ष हैं। इसी तरह झांसी के कार्यवाहक जिलाध्यक्ष पद पर बलवान सिंह यादव की नियुक्ति कर दी गई। झांसी में भगवानदास कोरी जिलाध्यक्ष थे। उनको भी हटाने का नोटिस दिया गया, न ही इस बाबत उनसे किसी प्रकार का संवाद किया गया।

आलाकमान को जब इसकी जानकारी मिली तो कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पत्र जारी कर तत्काल दोनों नियुक्तियों को निरस्त कर दिया। केसी वेणुगोपाल ने पत्र में लिखा कि कार्यवाहक जिलाध्यक्षों की नियुक्ति सांगठनिक प्रक्रिया को पूरा किए बगैर की गई है। पार्टी के संगठन से जुड़े लोगों का कहना है कि जिलाध्यक्ष या कार्यवाहक जिलाध्यक्ष की तैनाती के लिए जिले के प्रभारी सचिव, प्रभारी महासचिव, उपाध्यक्ष, प्रांतीय अध्यक्ष और जोन के राष्ट्रीय सचिव की सहमति जरूरी होती है। इसके बाद राष्ट्रीय अध्यक्ष और राष्ट्रीय कमेटी का अनुमोदन लेना होता है। इस मामले को लेकर आलाकमान गंभीर था। तब से खबर फ़ैल गई थी की प्रदेश अध्यक्ष को उनके पद से हटाया भी जा सकता है।

तीसरी वजह: 'तीन की तिकड़ी' में फंस गए थे खाबरी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव टिकट घोषणा के पहले से ही अलग-अलग मौकों पर कार्यकर्ताओं ने प्रियंका के टीम के सदस्यों की खुले मंच पर शिकायत की है। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं के अनुसार धीरज गुर्जर, संदीप और प्रदीप की तिकड़ी प्रदेश अध्यक्ष खाबरी पर भी हावी हो रही थी। मई में दिल्ली जाने की एक वजह रिपोर्ट कार्ड दिखाने के साथ-साथ तिकड़ी की शिकायत भी मानी जा रही थी। दरअसल खाबरी जब एससी डिपार्टमेंट में राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे। तब प्रदीप नरवाल को हरियाणा लॉबी के खिलाफ जाकर हरियाणा एससी डिपार्टमेंट का कार्याध्यक्ष बनाया गया था। फिर कुछ महीने बाद प्रदीप ने कोऑर्डिनेटर पद हासिल कर लिया और यूपी एससी डिपार्टमेंट के प्रभारी बने थे। कुल मिलकर प्रदीप खबरि के नीचे ही रहे। लेकिन अब उल्टा हो गया था। तिकड़ी हावी हो गई थी और खाबरी दबाव में रहकर काम नहीं करना चाहते थे। क्योंकि जिन जिला कार्यध्यक्षों की नियुक्ति खाबरी ने की थी, कहते हैं वो प्रियंका गांधी के टीम का ही फैसला था। जिसके लिए खाबरी को दिल्ली से फटकार लगाई गई थी। इसलिए बृजलाल खाबरी ने 'तिकड़ी' की शिकायत की और अब लगता है वो शिकायत उलटी पड़ गई है।


चौथी वजह: कांग्रेस के नारे की जगह 'जय भीम' के नारे ने ले ली थी

सूत्रों के मुताबिक बृजलाल के आने के बाद से कार्यकर्ताओं में एक चर्चा जोरो पर थी की अब पार्टी के कार्यक्रम में भी 'जय भीम' के नारे ने जगह ले ली थी। दरअसल खाबरी दलित कांग्रेस या यूं कहें कांग्रेस के SC डिपार्टमेंट के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष थे। इसलिए पिछले कुछ साल उनकी दलितों की टीम तैयार हो गई थी। जब वो प्रदेश में आए तो वही टीमें सक्रीय हुई और बातें फैलने लगी की बाकियों को पार्टी में तवज्जो नहीं दी जा रही है।