लखनऊ. मैं पार्टी छोडऩा नहीं चाहती थी, लेकिन पार्टी के कुछ यादव नेता उन्हें पार्टी में देखना पसंद नहीं कर रहे थे। वह मेरे जाति को लेकर मुझे परेशान कर रहे थे, इस कारण मैंने पार्टी से इस्तीफा देना ही उचित समझा। यह बात पंखुड़ी पाठक ने कहा, था, लेकिन अब पंखुड़ी को स:सम्मान पार्टी में वापस ले लिया गया है।