
Akhilesh Yadav
लखनऊ. बहुजन समाज पार्टी (Bahujan Samaj Party) सुप्रीमो मायावती (Mayawati) से गठबंधन टूटने के बाद समाजवादी पार्टी (Samajwadi Party) के राष्ट्रीय अध्यक्ष एक और गठबंधन को मौका दे सकते हैं। लोकसभा चुनाव (Loksabha Election) के बाद खाली हुई 13 विधानसभा सीटों पर अखिलेश यादव पूरी मजबूती के साथ उतरना चाहते हैं। शुक्रवार को हुई सपा कार्यालय में बैठक और मुलायम सिंह यादव (Mulayam Singh Yadav) के भी इसमें शामिल होने से अनुमान लगाया जा रहा है कि समाजवादी पार्टी किसी बडी़ रणनीति पर काम कर रही है। यह अनुमान इसलिए और भी मजबूत हो जाता है क्योंकि सुहैलदेव भारतीय समाज पार्टी (Suhaildev Bhartiya samaj Party) के अध्यक्ष ओम प्रकाश राजभर (Omprakash Rajbhar) भी एका एक उनसे मिलने सपा कार्यालाय पहुंचे। राजभर लोकसभा चुनाव के दौरान भाजपा से नकारे जाने के बाद पहली दफा वह अखिलेश से मिले और करीब घंटे भर मुलाकात की। यह मुलाकात योगी के कैबिनेट विस्तार के बाद बढ़ी राजभर की बेचैनी का नतीजा भी माना जा रहा है क्योंकि केबिनेट में भाजपा विधायक अनिल राजभर का कद बढ़ा दिया गया है। ऐसा कर भाजपा ने न सिर्फ ओमप्रकाश राजभर की कमी पूरी की है बल्कि राजभर वोट बैंक में सेंध लगाने की कोशिश भी की है। सेंध के मामले में भाजपा ने यादव गढ़ों को भी नहीं छोड़ा है। औरैया, कानपुर देहात, बदायूं जैसे क्षेत्रों से भाजपा ने कई नेताओं को मंत्रिमंडल में जगह दी है। जिसके बाद सपा आलाकमान भी चिंतित है।
13 सीटों पर होना है चुनाव, सुभासपा के दो तय-
इसके बाद अब सभी की नजर आगामी 13 विधानसभा सीटों पर उपचुनाव पर है। हालांकि भाजपा का उपचुनावों में रिकॉर्ड कुछ खास नहीं रहा है, लेकिन लोकसभा चुनाव के बाद पार्टी बेहद मजबूत स्थिति में दिख रही है। सपा के लिए भाजपा बड़ी चुनौती है। इसके तहत ओमप्रकाश राजभर और अखिलेश यादव की मुलाकात बेहद अहम मानी जा रही है। दोनों पार्टी में गठबंधन संभव है। वहीं राजभर पहले ही दो सीटों (अम्बेडकरनगर की जलालपुर और बहराइच की बलहा) पर चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। वैसे सपा कई अन्य छोटे दलों से भी गठबंधन करने की तैयारी में हैं। वह सभी सीटों पर चुनाव लड़ेगे या कुछ पर यह देखना भी दिलचस्प होगा।
और दलों से भी कर सकते हैं गठबंधन-
अखिलेश यादव गोरखपुर और फूलपुर लोकसभा उपचुनाव की तर्ज पर अपनी रणनीति तैयार कर रहे हैं। उन सीटों पर चुनावों में सपा ने निषाद पार्टी और पीस पार्टी से गठबंधन कर प्रत्याशियों को अपने सिंबल पर चुनाव लड़ाया, जिन्हें जीत भी मिली। आखिरी समय पर बसपा ने भी सपा प्रत्याशी को समर्थन दे दिया था जिससे जीत हासिल हुई। कैराना उपचुनाव में भी सपा-बसपा गठबंधन का जादू चला, लेकिन 2019 लोकसभा चुनाव में यह फॉर्मूला विफल हो गया था। लेकिन इसके बाद अखिलेश ने हार नहीं मानी है और गठबंधन के लिए उन्होंने नए साथियों की तलाश शुरू कर दी है।
Updated on:
24 Aug 2019 07:11 pm
Published on:
24 Aug 2019 07:10 pm
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