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एशिया के सबसे बड़े कैंसर अस्पताल में इलाज अभी नहीं

औपचारिक रूप से ओपीडी काउंटर चालू है लेकिन मरीजों के इलाज के नाम पर खानापूर्ति होती है।

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लखनऊ

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Laxmi Narayan

Aug 17, 2017

cancer institute chakgajaria lucknow

cancer institute chakgajaria lucknow

लखनऊ. एशिया के सबसे बड़े कैंसर इंस्टीट्यूट के रूप में निर्माणाधीन लखनऊ के चकगजरिया स्थित कैंसर अस्पताल में इलाज कराने के लिए फिलहाल मरीजों को कम से कम एक वर्ष का इन्तजार करना पडेगा। आधी-अधूरी व्यवस्थाओं के साथ जिस कैंसर अस्पताल की ओपीडी का पिछली अखिलेश सरकार में अफसरों ने लोकार्पण करा दिया था, वे अफसर ही बातचीत में कहते हैं कि अस्पताल में मरीजों के लिए उनके पास कोई सुविधा उपलब्ध नहीं है। औपचारिक रूप से ओपीडी काउंटर चालू है लेकिन मरीजों के इलाज के नाम पर खानापूर्ति होती है। उनके नाम से पर्चे बनाकर अस्पताल में तैनात डाक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ पर किये जा रहे वेतन भुगतान व अन्य खर्चों को जायज ठहराया जा रहा है। अस्पताल में मरीजों का इलाज तो दूर ओपीडी की मूलभूत सुविधाएँ भी उपलब्ध नहीं है।

कैंसर अस्पताल के रेडियोलॉजी विभाग को अटॉमिक एनर्जी सेंटर से नहीं मिली एनओसी

हैरत की बात यह है कि 938 करोड़ की लागत से बन रहे इस अस्पताल में अभी कई विभागों का निर्माण कार्य भी शुरू नहीं हुआ है। कैंसर अस्पताल में बेहद महत्वपूर्ण माने जाने वाले रेडियोलॉजी विभाग के लिए अभी तक इस अस्पताल को अनुमति नहीं मिली है। इसके लिए अटॉमिक एनर्जी सेंटर मुंबई से अनुमति मिलने के बाद विभाग के भवन का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। दरअसल रेडिएशन से जुड़े किसी काम के लिए अटॉमिक एनर्जी सेंटर से अनुमति लेनी पड़ती है। अस्पताल का दावा है कि बहुत जल्द उन्हें अनुमति मिल जाएगी। यहाँ से अनुमति मिलने के बाद इस विभाग के भवन का निर्माण कार्य शुरू हो सकेगा। ऐसे में अनुमान लगाया जा सकता है कि महत्वाकांक्षी कैसंर अस्पताल परियोजना के निर्माण में सरकारी स्तर पर किस तरह के सामंजस्य का अभाव रहा।

एनओसी में लगेगा वक्त, इसके बाद ही शुरू होगी ओपीडी

माना जा रहा है कि अभी रेडियोलॉजी विभाग के लिए अटॉमिक इनर्जी से एनओसी मिलने में वक्त लग सकता है। हालांकि अस्पताल के सीएमएस डॉ देशपाल कहते हैं कि अनुमति की प्रक्रिया अंतिम चरण में है और एक सप्ताह के भीतर अनुमति की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इस विभाग के निर्माण का काम शुरू हो जाएगा। ओपीडी के सवाल पर वे मानते हैं कि इसे ठीक तरीके से शुरू करने में कम से कम एक साल का समय लग सकता है।

अखिलेश यादव ने वाहवाही के चक्कर में कर दिया था अधूरे अस्पताल का लोकार्पण

कैंसर अस्पताल यूपी सरकार का एक महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट है। पिछली अखिलेश सरकार में इसे पूरा करने की कोशिश हुई लेकिन सफलता नहीं मिल सकी। तत्कालीन सीएम को खुश करने के लिए अफसरों ने इस आधे-अधूरे अस्पताल का लोकार्पण कर दिया था। अखिलेश ने भी वाहवाही लूटने के चक्कर में अफसरों पर यकीन कर इसका फीता काट दिया था। फिलहाल इस अस्पताल के निर्माण का काम तेजी से चल रहा है और योगी सरकार का दावा है कि इसके निर्माण में बजट की किसी तरह की कमी नहीं आएगी। इन सबके बीच फिलहाल कैंसर के मरीजों को लखनऊ के इस अस्पताल में इलाज कराने के लिए काफी लम्बा इन्तजार करना पड़ सकता है।