
सीडीआरआइ के निदेशक फार्मा कंपनी प्रतिनिधियों को प्रौद्योगिकी भी हस्तांतरित करते हुए।
लखनऊ. दिल के मरीज अब घबराएं नहीं। दिल का दौरा और स्ट्रोक के लिए जल्द ही कारगर और सस्ती दवा बाजार में उपलब्ध होने वाली है। इस दवा को ईजाद करने वाले लखनऊ के केंद्रीय औषधि अनुसंधान संस्थान (सीएसआईआर-सीडीआरआइ) ने उत्तर प्रदेश की निजी फार्मा कंपनी को अपनी प्रौद्योगिकी हस्तांतरित कर दी है। वैसे तो दिल के मरीजों के लिए बाजार में कई दवाएं हैं। लेकिन सीडीआरआइ की यह सुरक्षित दवा दिल के मरीजों को बड़ी राहत देने वाली है।
नयी दवा को बाजार में लाने के लिए सीडीआरआइ ने उत्तर प्रदेश की एक फार्मा कंपनी को दवा निर्माण की प्रौद्योगिकी ट्रांसफर कर दी है। ऐसा करने से फार्मा कंपनी को दवा बनानकर बाजार तक लाने में सुविधा रहेगी। गौरतलब है कि इससे पहले सीडीआरआइ के साथ रक्त के थक्का जमने की प्रक्रिया के नियंत्रक (मोडुलेटर) के रूप में सिंथेटिक यौगिक एस007-867के विकास के लिए समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। अब उसके निर्माण की तकनीक भी हस्तांतरित कर दी गई है।
क्यों पड़ता है दिल का दौरा
सीडीआरआइ के वैज्ञानिकों के मुताबिक नयी दवा कोरोनरी और सेरेब्रल धमनी रोगों के इलाज में बेहद कारगर है। दवा के लिए प्रथम चरण के नैदानिक परीक्षण शुरू करने की अनुमति मिल चुकी है। वैज्ञानिकों के अनुसार धमनी घनास्त्रता (आर्टेरीयल थ्रोंबोसिस) एक तीव्र जटिलता है, जो धमनियों की अवरुद्धता की वजह से बने पुराने घावों पर विकसित होती है। इसी वजह से दिल का दौरा और स्ट्रोक जैसी गंभीर बीमारी हो जाती है।
खून का थक्का बनने से रोकेगी दवा
प्रयोगों के माध्यम से पता चला है कि प्लेटलेट-कोलेजन इंटरैक्शन के संदमन (इन्हीबिशन) को आर्टेरीयल थ्रोम्बोसिस के इलाज में प्रयोग किया जा सकता है। इस प्रकार यह धमनियों में रक्त प्रवाह के वेग को बनाए रखता है और मुख्यत: थक्का जमने की वजह से रक्त वाहिका की रुकावट में देरी करता है और रक्त के थक्काबनने की प्रक्रिया को भी रोकता है। दवा इसलिए भी कारगर है कि यह कोरोनरी और सेरेब्रल धमनी रोगों के लिए वर्तमान में मौजूद अन्य उपचारों की तुलना में इस दवा में रक्तस्राव का जोखिम बेहद कम है।
जंतुओं पर किए गए प्रयोग
जंतुओं पर किए प्रयोगों में इस नई दवा ने न्यूनतम रक्तस्राव के साथ देखभाल के प्रचलित मानकों की तुलना में बेहतर एंटीथ्रॉम्बोटिक गुण प्रदर्शित किये हैं। सीडीआरआई ने हाल ही में इस दवा के लिए प्रथम चरण के नैदानिक परीक्षण शुरू करने की अनुमति भी प्राप्त कर ली है।
Published on:
17 Dec 2021 02:04 pm
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