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यूपी सरकार का बड़ा यू टर्न, बिजली विभाग में निजीकरण का फैसला लिया वापस

कर्मचारी और अभियंता संगठनों के दबाव में बीजेपी सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है।

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लखनऊ

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Abhishek Gupta

Apr 05, 2018

CM Yogi

CM Yogi

लखनऊ. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विद्युत विभाग के कर्मचारियों के भारी विरोध के बाद आखिरकार बिजली विभाग में निजीकरण के फैसले को वासप ले लिया है। बिजली विभाग में निजीकरण का प्रस्ताव अब ठंडे बस्ते में चला गया है। कर्मचारी और अभियंता संगठनों के दबाव में बीजेपी सरकार को यह फैसला लेना पड़ा है। ऊर्जा क्षेत्र में वितरण क्षेत्र के निजीकरण की तैयारी चल रही थी। आज बिजली कर्मचारियों के संगठन ने सीएम योगी से मुलाकात की थी, जिसके बाद उन्होंने यू-टर्न लेते हुए निजीकरण के प्रस्ताव को रद्द कर दिया। आपको बता दें कि यूपी के 7 जिलों - लखनऊ, वारणसी, गोरखपुर, मेरठ और मोरादाबाद- में निजीकरण के टेंडर रद्द कर दिए गए हैं। यूपी सरकार ने बिजली विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों को लिखित में यह आश्वासन दिया है। यूपी के ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा ने प्रतिनिधिमंडल को लिखित में यह आश्वासन दिया कि 5 शहरों और 7 जनपदों समेत प्रदेश के किसी भी जनपद का निजीकरण नहीं होगा। टेंडर प्रक्रिया को निरस्त किया जाता है।

9 एप्रेल से होने वाला था काम का बहिष्कार-

बीते हफ्ते यूपी सरकार के बजली नीजिकरण के फैसले के विरोध में विद्युत कर्मचारी काम छोड़ सड़क पर उतर आए थे। इसी के साथ ही उन्होंने ये ऐलान किया कि अगर सरकार ने यह फैसला वापस नहीं लिया तो 9 अप्रैल से 72 घंटे के लिए काम का बहिष्कार किया जाएगा। यूपी सरकार के तमाम दफ्तरों, मंत्रियों, विधायकों पर आरोप लगाते हुए उन्होंने कहा कि सरकार ने बिजली कंपनी का निजीकरण करने का फैसला इसलिए लिया है क्योंकि खुद सरकार की वजह से बिजली विभाग घाटे में है। उक्त लोगों का मिलाकर करीब 1000 करोड़ रुपए का बिजली बिल बकाया है।

भाजपा में भी उठे थे विरोध के स्वर-

वहीं इस मामले में भाजपा सांसद व विधायकों भी अपना विरोध जताते नजर आ रहे थे। भाजपा सांसद कौशल किशोर ने सीएम योगी को पत्र लिखकर प्राइवेट कंपनी द्वारा मुनाफा कमाने का मकसद उजागर किया और कहा कि प्राइवेट कंपनी कभी भी सार्वजनिक क्षेत्र का विकल्प नहीं हो पाएगी। लिहाजा सरकार अपने इस फैसले पर पुनर्विचार करे। इसी तरह वाराणसी के विधायक रविंद्र जयसवाल, मलिहाबाद से विधायक जय देवी, रफीक अंसारी, वाराणसी के विधायक और अपना दल विधान मंडल दल के नेता नील रतन सिंह पटेल 'नीलू' समेत कई नेताओं ने मुख्यमंत्री योगी को खत लिखकर उनसे अपना फैसला वापस लेने का आग्रह किया था।