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‘‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’’ के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मार्गदर्शी सिद्धान्त जारी

ओडीओपी से जोड़ी गई विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना  

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लखनऊ

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Anil Ankur

Dec 27, 2018

Yogi adityanath

योगी आदित्यनाथ

लखनऊ. उत्तर प्रदेश सरकार ने शहरी एवं ग्रामीण क्षेत्रों के स्थानीय दस्तकारों तथा पारम्परिक कारीगरों के विकास हेतु ‘‘विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना’’ शुरू की गई है। इसके तहत बढ़ई, दर्जी, टोकरी बुनकर, नाई, सुनार, लोहार, कुम्हार, हलवाई, मोची, राजमिस्त्री एवं हस्तशिल्पियों के आजीविका के संसाधनों को सुदृढ़ करते हुए उनके जीवन स्तर को उन्नत किया जायेगा। साथ ही इस योजना को एक जिला एक उत्पाद योजना से भी जोड़ा गया है। योजना के प्रभावी क्रियान्वयन हेतु मार्गदर्शी सिद्धान्त जारी कर दिये गये हैं।
यह जानकारी सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री सत्यदेव पचैरी ने दी है। उन्होंने बताया कि विश्वकर्मा श्रम सम्मान योजना के तहत पारम्परिक कारीगरों के कौशल वृद्धि हेतु उन्हें कौशल मिशन के आरपीएल से जोड़ा जायेगा तथा आॅन जाॅब टेªनिंग हेतु मास्टर क्राफ्टसमैन द्वारा प्रशिक्षित किया जायेगा। योजना से आच्छादित पारंपरिक कारीगरों एवं दस्तकारों को उद्यम के आधार पर कौशल वृद्धि हेतु छः दिवसीय निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण प्रदान किया जायेगा। प्रशिक्षण आईटीआई, उप्र खादी तथा ग्रामोद्योग बोर्ड के प्रशिक्षण केन्द्रों अथवा आयुक्त एवं निदेशक उद्योग द्वारा चिन्हित संस्थाओं के माध्यम से कराया जायेगा। प्रत्येक बैच में अधिकत्म 25 प्रशिक्षणार्थी होंगे। प्रशिक्षण अवधि में प्रशिक्षणार्थियों को श्रम विभाग द्वारा जारी अर्धकुशल श्रमिक के मजदूरी दर के समान मानदेय दिया जायेगा। उन्होंने बताया कि परम्परागत कारीगरों द्वारा प्रयोग किये जा रहे औजार पुरानी तकनीक पर आधारित है। प्रशिक्षण के बाद कारीगरों को आधुनिकत्म तकनीक पर आधारित उन्नत किस्म के टूलकिट दिये जायेंगे।
पचैरी ने बताया कि परम्परागत कारीगरों को अक्सर वित्तीय समस्या का सामना करना पड़ता है। इस योजना के तहत प्रशिक्षण एवं टूलकिट प्राप्त कर चुके लाभार्थियों को मार्जिन मनी योजनाओं अर्थात प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम, मुख्यमंत्री युवा स्वरोजगार योजना, एक जनपद एक उत्पाद वित्त पोषण हेतु ऋण दिलाने में वरीयता प्रदान की जायेगी।

लघु उद्योग मंत्री ने बताया कि योजना का लाभ प्राप्त करने हेतु आवश्यक शर्तें भी निर्धारित कर दी गयी है, जो इस प्रकार हैं आवेदक उत्तर प्रदेश का मूल निवासी होना चाहिए। आवेदक की न्यूनतम आयु 18 वर्ष होनी चाहिए। आवेदक को पारम्परिक कारीगरी से जुड़ा होना चाहिए। शैक्षिक योग्यता की कोई बाध्यता नहीं रखी गई है। आवेदक को मार्जिन मनी ऋण योजनाओं के तहत वित्त पोषण हेतु किसी राष्ट्रीयकृत बैंक/वित्तीय संस्था/सरकार संस्था आदि का डिफाल्टर नहीं होना चाहिए। परिवार का केवल एक ही सदस्य अर्थात पति या पत्नी में से एक ही आवेदन हेतु पात्र होगा। पात्रता जाति के आधार पर नहीं होगी। ऐसे भी व्यक्ति पात्र होंगे, जो परम्परागत कारीगरी करने वाली जति से भिन्न हो और इस व्यवसाय से जुड़े हों। इनको ग्राम प्रधान, अध्यक्ष नगर पंचायत अथवा नगर पालिका/नगर निगम द्वारा निर्गत प्रमाण पत्र प्रस्तुत करना होगा।
पचैरी ने बताया कि कौशल वृद्धि प्रशिक्षण एवं ऋण वितरण के लिए प्रशिक्षणार्थियों के चयन हेतु उपायुक्त उद्योग, जिला उद्योग एवं उद्यम प्रोत्साहन केन्द्र की अध्यक्षता में पांच सदस्यीय समिति गठित की गई है। इस समिति द्वारा चयनित लाभार्थिंयों के आवेदन पत्र एक सप्ताह के भीतर बैंक शाखा को प्रेषित करने होंगे। बैंक को भी एक माह के अंदर इसका निस्तारण करना होगा। ऋण स्वीकृत लाभार्थियों को मार्जिन मनी योजना की शर्तों के अनुसार उद्यमिता प्रशिक्षण कराया जायेगा। जिला स्तर पर गठित जिला बैंकर्स समिति एवं राज्य स्तर पर गठित राज्य स्तरीय बैंकर्स समिति द्वारा योजना के प्रगति की नियमित समीक्षा भी करेगी।