
लखनऊ. मौसम के बदले रुख ने एक बार फिर किसानों की परेशानी बढा दी है। प्रदेश भर में आंधी और बारिश के कारण मौसम में भले ही नरमी आ गई हो लेकिन खेतों में खडी फसलों के खराब होने से अन्नदाता किसानों एक बार फिर से कुदरत का कहर अपने ऊपर महसूस कर रहे हैं। खेतों में खडी फसल बर्बाद होने से किसानों के चेहरे मुरझाए हुए हैं। आंधी-बारिश के कारण कई जगह हुए हादसों में कई लोगों की मौत भी हुई है।
तेज हवाओं से बिछ गई फसलें
दरअसल बुधवार की रात आंधी व तेज बारिश ने लोगों को भले ही गर्मी से राहत दी हो लेकिन किसानों के लिए मुसीबत लेकर आई है। खेतों में खड़ी एवं कटी पड़ी फसल भीगने से किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया है। तेज हवाओं के चलते खेतों में खड़ी गेहूं की फसल खेंतो में बिछ गई है। वहीं फसल में पानी भरने से कटाई-मड़ाई का काम भी रुक गया है। तेज आंधी में खेतों में कटी पड़ी गेहूं की फसल उड़ने से किसान मायूस दिख रहे है। किसान अपना दुखड़ा रोते हुए बता रहे हैं कि वे फिर से बर्बादी की कगार पर आ गए है।
कई सालों से दैवीय आपदा झेल रहे हैं किसान
पिछले कई सालों से प्रदेश के किसान दैवीय आपदा का दंश झेल रहे हैं। प्रदेश के किसी हिस्से में ओलावृष्टि तो कहीं बाढ के कारण किसानों की फसलें लगातार बर्बाद होती रही हैं। बुंदेलखंड में सूखे के कारण किसानों की फसलें हर बार बर्बाद हो जाती हैं और राहत के लिए यहां के किसान लगातार आंदोलन का सहारा लेते हैं। किसानों के अरमानों पर अब एक बार फिर कुदरत ने पानी फेरना शुरू कर दिया है। चार दिन पहले बारिश के साथ छिटपुट ओलावृष्टि से किसानों के माथे पर चिंता की लकीरें खिंच गई थीं। खेतों में पकी खड़ी गेहूं की फसल को जल्द से जल्द घर लाने की कोशिश में किसान जुटे थे। कटाई-मड़ाई का काम लगातार जारी था लेकिन मंगलवार रात एक बार फिर आंधी के साथ बारिश ने किसानों को झटका दे दिया। रात करीब 12 बजे आंधी में घरों में रखे छप्पर, टिन शेड उड़ गए और पेड़ों की टहनियां टूटकर गिर गई।
आम पर भी असर
कानपुर देहात के सिठमरा के किसान पप्पू यादव का कहना है कि बेमौसम बारिश से पकी खड़ी गेहूं की फसल को नुकसान पहुंचा है। फसल की कटाई-मड़ाई का कार्य रुकने से किसानों के चेहरे मुरझा गए है। महेरा के सौरभ सिंह बताते हैं कि चार दिन पहले बारिश व ओले गिरने से आम की फसल को नुकसान पहुंचा था। इधर मंगलवार की रात आंधी व बारिश ने आम की बची फसल को भी चौपट कर दिया है। झींझक के शिवनंदन सिंह ने बताया कि तेज आंधी के कारण गेहूं की मड़ाई के बाद खेतों में पड़ा भूसा उड़ गया। खेतों में खड़ी गेहूं की फसल जमीन पर गिरने से नुकसान हुआ है। साथ ही अरहर की फसल को भी भारी नुकसान हुआ है।
बुंदेलखंड में भी नुकसान
बारिश और आंधी के कारण बुंदेलखंड में भी किसानों को नुकसान उठाना पडा है। जिन किसानों की फसलें कटी नहीं थीं या कटने के बाद खेतों में रखी हुई थी, उनकी पचास प्रतिशत तक की फसलें खराब हो गई हैं। भारतीय किसान यूनियन के बुंदेलखंड प्रभारी शिव नारायण परिहार बताते हैं जिन किसानों की फसलें खेतों में नहीं थी, उन्हें तो कोई नुकसान नहीं हुआ लेकिन जिनकी फसलें खेतों में थी, उन्हें काफी नुकसान उठाना पडा है। आंधी-बारिश के कारण फसलों की बर्बादी को लेकर उत्तर प्रदेश सरकार पूर्व में नुकसान के आंकलन का आदेश जारी कर चुकी है।
Updated on:
12 Apr 2018 01:10 pm
Published on:
12 Apr 2018 12:58 pm
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