13 फ़रवरी 2026,

शुक्रवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

एक दोस्ती ऐसी भी: मेडिकल की पढ़ाई के बाद स्ट्रीट डॉग्स से कर ली दोस्ती

फ्रेंडशिप डे के मौके पर दोस्ती के तमाम किस्से लोग साझा कर रहे हैं। हम आपको एक ऐसा किस्सा बता रहे हैं जिसमें कोई स्कूल या कॉलेज वाली दोस्ती नहीं बल्कि एक डॉक्टर और स्ट्रीट डॉग्स के बीच की है।

2 min read
Google source verification
hh

एक दोस्ती ऐसी भी: मेडिकल की पढ़ाई के बाद स्ट्रीट डॉग्स से कर ली दोस्ती

लखनऊ. फ्रेंडशिप डे के मौके पर दोस्ती के तमाम किस्से लोग साझा कर रहे हैं। हम आपको एक ऐसा किस्सा बता रहे हैं जिसमें कोई स्कूल या कॉलेज वाली दोस्ती नहीं बल्कि एक डॉक्टर और स्ट्रीट डॉग्स के बीच की है। राजधानी के इंदिरा नगर में रहने वाली डॉ.विशाखा शुक्ला ने केजीएमयू से मेडिकल की पढ़ाई करने के बाद नौकरी के बजाए पशुओं की केयर को ही अपना करियर चुना। वह एक दर्जन से ज्यादा स्ट्रीट डॉग्स की रोजाना देखभाल करती हैं। इसके अलावा अपनी संस्था के जरिए दूसरे जानवरों की मेडिकल केयर भी करती हैं। वे स्ट्रीट डॉग्स को ही अपना दोस्त मानती हैं। उनका कहना है कि पशुओं से ज्यादा वफादार कोई नहीं हो सकता।

पशुओं के लिए डेडिकेट

विशाखा नवाबी टेल्स नाम की एक संस्था चलाती हैं। इस संस्था के जरिए पालतू व स्ट्रीट डॉग अडॉप्ट करने के कैंप लगाए जाते हैं। इसके अलावा वह मेडिकेयर की सारी सुविधाएं भी उपलब्ध करवाती हैं।विशाखा के निर्देशन में कई युवा इस संस्था से जुड़े हैं। विशाखा के मुताबिक, 'मैं रात-दिन जानवरों की केयर करती हूं, मुझे उनसे जु़ड़ा कोई भी केस पता चलता है तो रात भर नींद नहीं आती है।' विशाखा के मुताबिक बैकयार्ड ब्रीडिंग पर रोक लगना बेहद जरूरी है। वह इसके खिलाफ मुहिम चलाएंगी लालच के खेल में घर-घर खुले ब्रीडिंग सेंटरों में बेजुबानों का 'मौत' के मुंह में धकेला जा रहा है। वे चाहती हैं कि राजधानी के स्ट्रीट डॉग्स को कोई तकलीफ न हो।

छह स्ट्रीट डॉग्स को दी ट्रेनिंग

विशाखा ने छह स्ट्रीट डॉग्स को एनिमल कम्यूनिकेशन लगभग ट्रेनिंग डेढ़ साल ट्रेनिंग दी है। यह सभी डॉग्स रेस्क्यू किए गए हैं। ये डॉग्स न सिर्फ नेत्रहीनों को रोड क्रॉस करवाएंगे बल्कि टॉयलेट ले जाने से लेकर उनके कई जरूरी काम निपटाएंगे। जी हां, ऐसा संभव करने का दावा किया है विशाखा ने। जिन छह कुत्तों को विशाखा ने ट्रेनिंग दी है उनके नाम-डूड, बेला, पीचिस, मायलो, डॉलर व बूज़ो हैं। इसके अलावा उन्होंने दो नेत्रहीनों से भी संपर्क किया है जिन्हें वह आजकल ट्रेनिंग दे रही हैं। विशाखा का दावा है कि उनकी ट्रेनिंग के बाद स्ट्रीट डॉग्स नेत्रहीनों को रास्ता दिखाएंगे।

क्या है एनिमल कम्यूनिकेशन

पशु-पक्षी भी आपस में एक दूसरे से संवाद करते हैं। उनका यह संवाद एनिमल कम्यूनिकेशन कहलता है। इस संवाद को समझने के लिए और पशुओं से संवाद करने के लिए एनिमल कम्यूनिकेशन की स्टडी की जाती है। इसके जरिए पशुओं को करीब से समझने का मौका मिलता है। विदेश में कई ऐसे संस्थान हैं जहां एनिमल कम्यूनिकेशन के डिप्लोमा कोर्सेज चलाए जाते हैं।विशाखा का दावा है कि जिन छह स्ट्रीट डॉग्स को उन्होंने ट्रेनिंग दी है वे पुलिस की मदद भी कर सकते हैं। आमतौर पर पुलिस स्कॉयड के साथ विदेशी डॉग्स ही होते हैं लेकिन विशाखा ने दावा किया है कि जिन डॉग्स को वे ट्रेनिंग दे रही है वो विदेशी डॉग्स से ज्यादा तेज हैं। विशाखा का दावा तो ये भी है कि एनिमल कम्यूनिकेशन के जरिए खोए हुए डॉग्स को भी ढूंढ़ा जा सकता है।