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31 दिसम्बर तक करें Income Tax रिटर्न फाइल, नहीं तो होगा बड़ा नुकसान

Income Tax रिटर्न भरने वालों के लिए अब सिर्फ एक दिन का ही समय शेष बचा हुआ है। क्योंकि 31 दिसंबर इसकी अंतिम तिथि है। आपको बताते चलें कि 2020-21 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने वालों की संख्या 26 दिसंबर तक 4.51 करोड़ से भी अधिक हो चुकी है। इस लिए जल्द से जल्द अपना ITR आप भी भर दें।

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लखनऊ

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Dinesh Mishra

Dec 30, 2021

Symbolic Photo To Show Filing Income Tax Return

Symbolic Photo To Show Filing Income Tax Return

लखनऊ. भारत में रहकर अपना व्यापार करने वाले अथवा नौकरी पेशा व्यक्तियों के लिए अपना इनकम टैक्स भरना बहुत जरूरी होता है। हर साल के अंत में 31 दिसंबर तक रिटर्न यानी ITR फाइल करना बहुत ही जरूरी होता है। इसलिए अभी तक आपने इनकम टैक्स फ़ाइल नहीं किया है तो तत्काल उसे भरकर जमा कर दें। वरना बड़ी समस्या के रूम में आपको पेनल्टी भी देनी पड़ सकती है। आपको बताते चलें कि फाइनेंशियल ईयर 2020-21 के लिए इनकम टैक्स रिटर्न जमा करने वालों की संख्या 26 दिसंबर तक 4.51 करोड़ से भी अधिक हो चुकी है। इस लिए जल्द से जल्द आप भी भर दें।

क्या जरूरी है?
31 दिसंबर की देर शाम तक भी अगर आपको इन कम टैक्स रिटर्न भरना है तो आपके पास डिजिटल सिग्नेचर होना बहुत ही आवश्यक है। इसके लिए इलेक्ट्रॉनिक मोड से बिना डिजिटल सिग्नेचर यानी बिना ई-वेरिफिकेशन आयकर रिटर्न (ITR) फाइल करने वाले व्यक्ति को ITR अपलोडिंग के 120 दिनों के अंदर वेरिफाई करना होता है.

इसके लिए 4 तरीके हैं-
आधार ओटीपी के जरिए इसे भरना आसान होता है।
नेट बैंकिंग के जरिए ई-फाइलिंग अकाउंट में लॉग इन करना होगा।
इलेक्ट्रॉनिक वेरिफिकेशन कोड (EVC) के जरिए भी इसे पूरा किया जा सकता है।
ITR-V के दोनों तरफ दस्तखत की हुई कॉपी को बैंगलुरु भेजें।

income tax Return में चूक गए तो होगी जेल? कितना पड़ेगा जुर्माना

भारत में Income Tax रिटर्न भरने के लिए आपको 31 दिसंबर तक का समय आधिकारिक रूप से दिया जाता है। इसके बाद फाइल करने वालों को लेट फीस के रूप में अच्छा खासा रु खर्च होता है। इसकी लेट फीस 10,000 रु चुकानी होती है। जबकि 5 लाख रु तक की आय वाले टैक्स पेयर्स को लेट फीस के तौर पर मात्र 1 हजार रुपए ही पेनल्टी देनी होगी। लेकिन, ज्यादा आय वालों पर यह बढ़ता जाता है. अगर आप Income tax नहीं भरते हैं, तो विभाग आपको भेज सकता है. रिटर्न फाइल नहीं करने वालों पर टैक्स गणना के मूल्य का 50% से लेकर 200% तक जुर्माना लग सकता है. इसके साथ ही ज्यादा वैल्यू वाले केसों में 7 साल की कठोर सजा हो सकती है.