
stud backer car used by Godse to kill Gandhiji
अनिल के. अंकुर
लखनऊ। महात्मा गांधी की हत्या में प्रयोग की गई स्टड बेकर कार अब लखनऊ नहीं आती। पहले बरेली के कमाल साहब इस कार की परवरिश करते थे तो वेेंटेज कार रैली में अक्सर लेकर आते थे, अपने अंतकाल से पहले उन्होंने इस गाड़ी को दिल्ली के परवेज को बेच दिया था।
दरअसल, इस कार की कहानी जरा लम्बी है। इस कार को नाथू राम गोडसे ने महात्मा गांधी की हत्या में प्रयोग किया था। हत्या के बाद जब नाथूराम गोडसे पकड़े गए तो यह कार भी बरामद हो गई। मुकदमें के दौरान यह कार सरकारी मालखाने में जब्त रही। 1978 में इस कार की नीलामी हुई तो यह कार गुजरात के एक रईश ने खरीदी। उसके बाद राजा बनारस ने इस कार को खरीद लिया। 90 के दशक में राजा बनारस ने इस कार की नीलामी की तो बरेली से कमाल साहब इस कार को खरीदने पहुंच गए। कमाल साहब का बरेली के चौपला चौरहे पर एक बड़ी सी गैराज है। इस गैराज में वे हमेशा पुरानी कारों की ही मरम्मत करते दिखते थे।
करीब डेढ़ दशक पहले कमाल साहब ने खुद बताया था कि उन्होंने इस कार को कैसे खरीदा। स्टड बेकर यहां लाने के बाद उन्होंने इसके तमाम औजारों को खराद में जाकर बनवाया। कार चलने लायक हो गई। बाद में रेस में भाग लेने लगी। उन्होंने ही इस कार से करीब तीन दर्जन राष्ट्रीय स्तर की रेसों में भाग लिया। काले रंग क इस कार का नाम उन्होंने किलर रखा। यूं तो कार का नम्बर यूएसएफ 73 था पर उन्होंने इसके साथ उसके ऊपर किलर लिख रखा था। यह पूछे जाने पर इस कार का नाम उन्होंने किलर क्यों रखा था, वे यही कह देते, महात्मा गांधी को मारने के लिए इसका उपयोग किया गया था तो यह किलर हुई न?
जब से यह कार दिल्ली में परवेज ने खरीदी है तब से उसका यूपी से नाता टूट गया है। पहले वह साल में दो बार लखनऊ और बरेली की वेंटेज कार रैलियों में हिस्सा लेने आती थी, पर अब नहीं आती। लोग इस किलर कार को देखने के लिए आतुर हैं। पुरानी कारों के शौकीन वकील अहमद का कहना है कि वे इस कार को यूपी वापस लाएंगे। परवेज सिद्दीकी नई दिल्ली के लक्ष्मी नगर के रहने वाले हैं और अब उनके भाई रहमान इस कार की रख रखाव करते हैं।
Published on:
01 Oct 2017 05:06 pm
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