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Mobile की स्क्रीन टूटने का डर खत्म, नहीं खराब होगा लैपटाप का Display

Mobile, TV, Laptop Creen टूट जाए तो बहुत दुख होता है। स्क्रीन खराब हो जाए तो आँखें खराब होने का खतरा बना रहता है। जिससे माइग्रेन जैसी बड़ी बीमारी हो सकती हैं। वहीं उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के एक कालेज के प्रोफेसर ने एक ऐसी स्क्रीन बनाई है। जो ज्यादा समय तक चलती रहेगी। जिसके टूटने के चांस बहुत कम होंगे। पत्रिका आपको बता रहा है इस रिसर्च के बारे में।

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लखनऊ

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Dinesh Mishra

Feb 03, 2022

Symbolic Image to Show Display of Mobile, Laptop

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उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ में एक कालेज केकेसी में पढ़ाने वाले सीनियर असिस्टेंट प्रोफेसर कमल कुमार पाड़े फिजिक्स के कई थ्योरिज में एक्सपर्ट हैं। डॉ कमल कुमार पांडे ने लिक्विड क्रिस्टल टेक्नोलोजी पर रिसर्च किया है। जिसमें उन्होने 'टू कंट्रोल द एलाइनमेंट प्राब्लम आफ लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले इन हार्स एंबियंट कंडीशन' पर रिसर्च किया है। जिसका सीधा फायदा मोबाइल, टीवी, लैपटॉप इस्तेमाल करने वाले हर व्यक्ति को होने जा रहा है।

Nano Technology Research

फिजिक्स प्रोफेसर डॉ पांडे को 'उत्तर प्रदेश सरकार में उच्च शिक्षा विभाग की रिसर्च एंड डेवलपमेंट' प्लान के तहत मार्च 2021 इस पर रिसर्च करने के लिए प्रोजेक्ट दिया गया था। इस सबजेक्ट पर रिसर्च के लिए डॉ पांडे के साथ केकेसी कालेज की प्राचार्य डा. मीता साह, लखनऊ यूनिवर्सिटी के फिजिक्स टीचर प्रो. राजीव मनोहर और पोस्ट डाक्टोरल फेलो डा. बीपी सिह शामिल रहे हैं।

Screen or Displayक्यों खराब हो जाता है

डॉ पांडेय बताते हैं कि आम तौर पर 'लिक्विड क्रिस्टल डिस्प्ले' का प्रयोग घरों में एलसीडी टीवी, कैलकुलेटर, मोबाइल फोन, लैपटाप, कंप्यूटर की स्क्रीन आदि में होता है। लेकिन कई मामलों में ज्यादा या बहुत कम टेम्परेचर होने पर जल्दी ही में डिस्प्ले का मालिक्यूलर एलाइनमेंट खराब हो जाता है। जिससे स्क्रीन खराब हो जाती है। धुंधली दिखाई देने लगती है। कई बार ये टूट भी जाती है।

'Liquid Crystal Display'उत्तर प्रदेश की स्क्रीन होगी दुनिया भर में सप्लाई

रिसर्च में नैनो टेक्नोलोजी का प्रयोग करके छोटी लिक्विड क्रिस्टल सेल बनाई गई। इस सेल लगभग एक वर्ग मिली मीटर साइज का बनाया गया है। जिसमें नैनो पार्टिकल्स को लिक्विड क्रिस्टल में मिलाकर कालेज की लैब में ही इसे तैयार किया गया है। जिसके परीक्षण में ये डिस्प्ले बहुत लंबे समय तक चलने वाले और अधिक व कम टेम्परेचर पर काम कर रही है। जिसका सीधा सा मतलब है कि अब इन पार्टिकल का प्रयोग करके किसी भी प्रकार के इलेक्ट्रोनिक प्रोडक्ट की स्क्रीन पर सकेंगे।

डा. पांडेय का कहना है कि जल्द ही इसे पब्लिक के बीच लाने का प्रयास किया जाएगा। जिससे हमारे इस नई टेक्नोलोजी का फाइदा हर किसी को मिल सके। इससे घरों में टीवी, मोबाइल फोन आदि लंबे समय तक चल सकेंगे.

कब तक आएगा मार्केट में ?

हालांकि इस टेक्नोलोजी को मार्केट में आने में कितना समय लगेगा इस पर अभी तक कोई आधिकारिक पुष्टि अथवा बयान नहीं जारी किया गया है। जबकि उम्मीद है कि जल्द ही उत्तर प्रदेश के द्वारा इसका कॉपी राइट लेने के बाद इसे बनाने के लिए आगे की प्रक्रिया पर काम शुरू हो सकता है।