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शिवपाल की होर्डिंग में शामिल हुए मुलायम सिंह यादव, अचानक हुआ ये एेलान

शिवपाल की होर्डिंग में शामिल हुए मुलायम सिंह यादव, अचानक हुआ ये एेलान    

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लखनऊ

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Ruchi Sharma

Sep 07, 2018

mulayam

शिवपाल की होर्डिंग में शामिल हुए मुलायम सिंह यादव, अचानक हुआ ये एेलान

लखनऊ. समाजवादी सेक्युलर मोर्चा के नेता व जसवंतनगर से विधायक शिवपाल सिंह यादव पूरी तरह नए तेवर में उतर चुके है। सेक्युलर मोर्चा के गठन के बाद वे नए नए एेलान से राजनीति में खलबली मचा दिया है। उन्होंने इस मोर्चे के तहत यूपी की सभी 80 सीटों पर प्रत्याशी उतारने का ऐलान किया है। वहीं इस बीच लखनऊ में शिवपाल के आवास से लेकर विक्रमादित्य मार्ग पर सेक्युलर मोर्चे के पोस्टर जगह-जगह चिपका दिए गए हैं। इस होर्डिंग्स में खास बात ये है कि समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी दिखाई दे रहे हैं। इसके अलावा होर्डिंग्स में शिवपाल यादव और आदित्य की तस्वीर भी लगी हुई है। कई होर्डिंग में तो समाजवादी नेता स्वर्गीय जनेश्वर मिश्रा की भी फोटो लगी है।

सेक्युलर मोर्चा की होर्डिंग आई सामने


शिवपाल यादव ने अपने सेक्युलर मोर्चा की होर्डिंग से एक बार फिर सबको चौंका दिया है। ये सभी होर्डिंग शिवपाल यादव के आवास से लेकर विक्रमादित्य मार्ग तक लगाई गयी हैं। इस होर्डिंग्स में सबसे बड़ी बात ये सामने आई है इसमें समाजवादी पार्टी के संरक्षक मुलायम सिंह यादव भी दिखाई दे रहे हैं। जिससे राजनीति गलियारों में हलचल बढ़ गई है। इसके अलावा होर्डिंग्स में शिवपाल यादव और आदित्य की तस्वीर भी लगी हुई है। कई होर्डिंग में तो समाजवादी नेता स्वर्गीय जनेश्वर मिश्रा की भी फोटो लगी है।

ताजी का सम्मान ही उनके लिए सब कुछ हैं : शिवपाल

बता दें कि शिवपाल यादव ने समाजवादी सेक्युलर मोर्चा का गठन करने के बाद अपना बयान दिया है। उन्होंने कहा कि काफी इंतजार करने के बाद नेताजी से पूछकर समाजवादी सेकुलर मोर्चा बनाने का फैसला किया है। उन्होंने कहा कि नेताजी का सम्मान ही उनके लिए सब कुछ हैं।

शिवपाल का अखिलेश पर बड़ा निशाना

इससे पहले भी शिवपाल सिंह अपने बयान में कह चुके हैं कि रावण बहुत ज्ञानी था, लेकिन उसका अहंकार ही पतन का कारण बना था। इसी तरह कंस ने भी अपने पिता, बहन, बहनोई आदि को जेल में डाल दिया था, जिसके कारण ही भगवान श्रीकृष्ण ने उसका पतन करके धर्म की स्थापना की थी। उन्होंने कार्यकर्ताओं से कहा कि समाजवादी पार्टी में लगातार उनकी उपेक्षा की जा रही थी, यहां तक मैं किसी जिले का दौरा करने जाता था तो वहां के पार्टी पदाधिकारियों को मुझसे दूरी बनाने के लिए निर्देशित किया जाता था। उन्हें पार्टी के किसी भी कार्यक्रम में नहीं बुलाया जाता था फिर भी अपमान सहकर परिवार तथा पार्टी को एक रखने के लिये उन्होंने भरसक प्रयास किया।