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दस हजार रुपये के चक्कर में नहीं हो रही थी करोड़ों की कंपनी ‘पेटीएम’ के मालिक की शादी

पेटीएम कंपनी लगातार आगे बढ़ रही है कंपनी अब इतनी बड़ी हो गई है कि कंपनी के वर्तमान व पूर्व कर्मचारी करोड़पति बन गए हैं। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार पेटीएम के करीब 350 कर्मचारियों के पास कम से कम एक करोड़ की नेटवर्थ इनकम है। पेटीएम ने बहुत ही कम समय में ऊंचाइयां छूईं हैं और अभी इसे और लंबा सफर तय करना है।

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लखनऊ

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Prashant Mishra

Nov 18, 2021

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लखनऊ. वर्ष 2017 में सबसे युवा अरबपति के तौर पर चुने गए पेटीएम के संस्थापक विजय शेखर भले ही आज करोड़ों में खेलते हैं लेकिन एक समय ऐसा भी था जब उनकी शादी नहीं हो रही थी। एक दौर था जब कोई बाप उन्हें अपनी बेटी देने को तेयार नहीं था। अपने एक बयान में विजय शेखर ने बताया है कि वर्ष 2004-5 में मेरे पिता ने मेरी कंपनी को बंद करने के लिए कहा था। क्योंकि मेरी शादी नहीं हो रही थी उस समय मेरी सैलरी दस हजार रूपये थी। लोग शादी के लिए आते थे लेकिन जब उन्हें यह पता चलता था कि लड़का मात्र दस हजार रुपये महीने कामाता है तो फिर वो पलट कर वापस नहीं आते थे।

विजय को पसंद है साधारण जीवन

विजय शेखर ने बताया कि उन्हें आज भी सामान्य जीवन जीना पसंद है और वो आज भी ठेले पर भोजन करते हैं और सड़क के किनारे चाय पीते हैं। विजय शेखर ने बताया कि वो वर्ष 2005 में एक छोटी सी कंपनी चलाते थे। ये कंपनी मोबाइल कंटेंट बेचने का काम करती थी। उस समय मुझे दस हजार रुपये प्रति महीने की तनख्वाह मिला करती थी।

लगातार बढ़ रहा पेटीएम

पेटीएम कंपनी लगातार आगे बढ़ रही है कंपनी अब इतनी बड़ी हो गई है कि कंपनी के वर्तमान व पूर्व कर्मचारी करोड़पति बन गए हैं। कंपनी के आंकड़ों के अनुसार पेटीएम के करीब 350 कर्मचारियों के पास कम से कम एक करोड़ की नेटवर्थ इनकम है। पेटीएम ने बहुत ही कम समय में ऊंचाइयां छूईं हैं और अभी इसे और लंबा सफर तय करना है।

लोवर मिडिल क्लास से हैं विजय

पेटीएम के संस्थापक विजय ने अपनी मेहनत और काबिलियत के दम पर बड़ा मुकाम हासिल किया है। लेकिन वह अपने बारे में बताते हैं कि उनके जीवन में ऐसा भी दौर था जब उनके पास खाने-पीने तक के पैसे नहीं हुआ करते थे। ऐसे में जब उन्हें भूख लगती थी वह अपने दोस्तों के पास पहुंच जाते थें। इन तमाम दिक्कतों के बावजूद उन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी और दिन रात मेहनत करते रहे। मेहनत का ही नतीजा है कि विजय ने पेटीएम जैसी बड़ी कंपनी खड़ी कर ली। विजय शेखर ने मिडल क्लास फैमिली से अमीरी तक का सफर तय किया है जो काफी दिलचस्प भी है। ये उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ जिले के रहने वाले हैं और एक लोवर मीडिल क्लास से आते हैं।

नहीं आती थी अंग्रेजी

विजय ने अपने एक इंटरव्यू में बताया है कि जब इन्होंने दिल्ली के इंजीनियरिंग कॉलेज में एडमिशन लिया तो उनके सामने सबसे बड़ी समस्या अंग्रेजी थी। ये अपने साथियों के साथ अंग्रेजी नहीं बोल पाते थे। लेकिन इन्होंने धीरे-धीरे अपनी अंग्रेजी पर काम किया और अंग्रेजी भाषा पर कम ही समय में कमांड हासिल कर लिया। विजय की बचपन से ही वेबसाइट व नेटवर्किंग में रुचि थी 15 साल की उम्र में ही उन्होंने पहली वेबसाइट बनाई।

ऐसे आया पेटीएम का आईडिया

विजय बताते हैं कि ऑफिस से आते जाते समय दुकान पर खुले पैसे का पेमेंट करने में इन्हे दिक्कत का सामना करना पड़ता था। हर रोज भुगतान के लिए टूटे पैसों का इंतजाम करना पड़ता था। इस समस्या से बचने के लिए मैं सोचता था कि क्या कुछ ऐसा हो सकता है कि टूटे पैसों का आसानी से भुगतान हो सके और लोगों को परेशान न होना पड़े। यहीं से पेटीएम का आइडिया आया।