29 जनवरी 2026,

गुरुवार

Patrika Logo
Switch to English
home_icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

लॉन्च हुई RERA वेबसाइट, स्लम की जगह मल्टी स्टोरी बिल्डिंग बनाने पर ज़ोर

http://up-rera.in/ पर जाकर बिल्डर अपने प्रोजेक्ट्स का रेजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

2 min read
Google source verification

image

up online

Jul 26, 2017

UPRERA

UPRERA

लखनऊ। प्रदेश में बिल्डरों की मनमानी नहीं चलेगी। सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बुधवार सुबह अपने आवास 5 कालिदास मार्ग
से उत्तर प्रदेश रियल एस्टेट रेगुलेटरी अथॉरिटी की ऑफिशियल वेबसाइट का
लॉन्च किया। http://up-rera.in/ पर जाकर बिल्डर अपने प्रोजेक्ट्स का रेजिस्ट्रेशन कर सकते हैं।

प्रदेश में चल रहे सभी प्रोजेक्ट को रेरा में अपना रजिस्ट्रेशन
कराना होगा। इसके लिए आखिरी तारीख 31 जुलाई निर्धारित की गई है। यानी 1 अगस्त से
ऐसे सभी बिल्डरों पर कार्रवाई की जा सकेगी जो रेरा के अंतर्गत नहीं आएंगे। बिल्डरों के ऑनलाइन आवेदन करने के बाद करीब 30 से 37
दिन तक रजिस्ट्रेशन मान्य हो जाएगा।

क्या बोले योगी
इस

मौके पर सीएम के साथ कई अन्य मंत्री और नेता भी शामिल रहे। राजेश अग्रवाल,
धर्मपाल , सुरेश
पासी, एस पी बघेल आदि सदस्यो ने अपनी उपस्थिति दर्ज कराई। मुख्यमंत्री ने
कहा कि रेरा के लागू होने से हम प्रधानमंत्री के सपने सबको आवास का सपना
पूरा करेंगे। हर एक व्यक्ति को अपनी छत मिलेगी। मौजूदा समय में बिल्डर और
खरीदार के बीच भरोसे की कमी। रेरा जनता के इस भरोसा को कायम करेगा। हम
चाहते हैं बिल्डर और सरकार मिलकर सबके आवास का सपना पूरा करें। लेकिन अगर
अब किसी बिल्डर ने धोखाधड़ी की तो अंजाम बुरे होंगे।
रेरा बिल्डर, जनता और सरकार के बीच संवाद का जरिया है।
इस क्षेत्र में काम करने वाले लोगों को भी सरकार प्रोत्साहन देगी। शहरों
में स्लम एरिया की जगह मल्टी स्टोरी भवन देकर लोगों को घर तो मिलेगा ही
साथ ही गंदगी से छुटकारा भी दिलाया जा सकता है। इससे स्वच्छ भारत अभियान
का लक्ष्य भी पूरा होगा और सबको आवास का भी। सरकार अपनी योजनाओं में इसे
प्राथिमिकता देगी।

अनियोजित विकास करने वाले बिल्डरों को चेता चुके हैं !
मुख्यमंत्री
दो दिन पहले एक कार्यक्रम में अनियोजित विकास करने वाले बिल्डरों को चेता
चुके हैं। उन्होंने कहा था कि नॉएडा हो या लखनऊ कई बिल्डर अनियोजित ढंग से
विकास कर रहे हैं।
शहर के पुराने इलाकों में ऊँची इमारतें तो बन जाती है लेकिन जनता को सीवर
/ पानी जैसी मूल भूत सुविधाएं नहीं मिलती। कई बार बनी इमारतें नक़्शे के
विपरीत होती हैं। पोजेशन देने में भी कुछ बिल्डर देरी करते हैं। ऐसे में
ज़रुरत पड़ने पर सरकार सख्त कदम उठाएगी

1 लाख फ्लैट्स के निर्माण में आ सकती है रुकावट
रेरा
में प्रोजेक्ट के रेजिस्ट्रेशन में करीब एक महीने से अधिक का वक़्त लग रहा
है। ऐसे में प्रदेश भर में एक लाख और गोइंग प्रोजेक्ट्स (फ्लैट्स) पर
असर
इसका असर पड़ सकता है। करीब 10 हज़ार ऑन गोइंग प्रोजेक्ट्स वालों ने रेरा में रजिस्टर करने
का प्रयास किया लेकिन हो नहीं पाया। अब ऑनलाइन में सभी बिल्डर एक साथ आवेदन कर रहे हैं।

सरकारी विभाग भी रेरा एक दायरे में
निजी
बिल्डरों के साथ ही प्रदेश भर के प्राधिकरण और आवास विभाग, रियल एस्टेट
रेगुलेटरी अथॉरिटी
(रेरा) के दायरे में आएंगे। आवासीय योजनाओं में कब्जे के लिए प्रदेश भर में
करीब पचास हजार से अधिक आवंटी भटक रहे हैं। 1 अगस्त से लागू होने वाले इस
बिल के बाद इन सरकारी विभागों पर भी कार्रवाई हो सकेगी।

Story Loader