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आरएसएस ने तैयार किया भाजपा के लिए यूपी फतह का रोडमैप

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने उत्तर प्रदेश सहित निकट भविष्य में होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी पूरी रणनीति तैयार कर ली है। कानपुर में हुई आरएसएस के मंथन में उन राज्यों में सुनियोजित ढंग से ताकत लगाने की रणनीति तैयार की गई है।

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Raghvendra Pratap

Jul 18, 2016

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लखनऊ. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) ने उत्तर प्रदेश सहित निकट भविष्य में होने वाले राज्यों के विधानसभा चुनाव को लेकर अपनी पूरी रणनीति तैयार कर ली है। कानपुर में हुई आरएसएस के मंथन में उन राज्यों में सुनियोजित ढंग से ताकत लगाने की रणनीति तैयार की गई है जहां भाजपा को 2014 के चुनाव में सीटें तो नहीं मिली लेकिन वोट प्रतिशत में बड़ा इजाफा हुआ।

आरएसएस ने शुरू की 2019 की तैयारी
आरएसएस का संकल्प है कि सबसे निचले तबके तक सरल व उच्च कोटि की शिक्षा और सस्ते इलाज की सुविधा होनी चाहिए। इसके लिए केंद्र और राज्यों में समान विचारधारा की सरकार जरूरी है। कानपुर से आरएसएस ने अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा के जरिए नई क्रांति की पहल की है। कई दिनों तक चले मंथन में उत्तर प्रदेश के विधान सभा का चुनाव तो मुद्दा है ही, 2019 में होने वाले लोकसभा चुनाव को लेकर भी कवायद शुरू हो गई है।

सभी अनषांगिक संगठनों को एकजुट होने के निर्देश
आरएसएस ने भाजपा और विहिप के अलावा वनवासी कल्याण सेवा आश्रम, लघु उद्योग भारती, किसान संघ, आरोग्य भारती, भारतीय मजदूर संघ, किसान संघ, भारतीय मुस्लिम मंच जैसे कई प्रमुख संगठनों के प्रचारक और कार्यकर्ताओं को क्षेत्रों और राज्यों में सुनियोजित ढंग से ताकत लगाने का मंत्र दिया है। अनुषंगिक संगठनों के प्रभारियों तथा क्षेत्र और प्रांत प्रचारकों को स्पष्ट कर दिया गया है कि योजनाओं के क्रियान्वयन के लिए सरकार बनानी जरूरी है।

जनाधार खिसके नहीं इस पर काम कर रहा संघ
आरएसएस से जुड़े कुछ नेताओं से बातचीत करने पर उनका कहना था कि संघ कभी सियासी मुद्दों पर बातचीत नहीं करता। लेकिन शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी योजनाओं के क्रियान्वयन का संकल्प जरूर है। जिन राज्यों में भाजपा को 2014 के चुनाव में बड़ी सफलता मिली वहां पर जनाधार खिसकने का खतरा भी है। आरएसएस का इन राज्यों में ठोस कार्यक्रमों के जरिए जनाधार बढ़ाने पर जोर है।

वोट मिले पर सीटें नहीं
पिछली चुनाव में उड़ीसा, पश्चिम बंगाल, मेघालय, पंजाब और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भाजपा को वोट जरूर मिले लेकिन सीटें नहीं मिली। मसलन पश्चिम बंगाल में भाजपा को 42 में केवल दो सीटें हासिल हुई लेकिन वोट 17 प्रतिशत से ज्यादा मिले। ऐसे ही उड़ीसा की 21 सीटों में भाजपा को सिर्फ एक सीट मिलने के बावजूद करीब 22 प्रतिशत मत मिले। मेघालय, पंजाब, तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी भाजपा ने वोट बटोरे।

आम जन से जुडे़ंगे संघ कार्यकर्ता
अब रणनीति यह है कि सभी अनुषंगिक संगठन इन इलाकों में आम जन से सुख-दुख का रिश्ता जोड़ें और वोटों में वृद्धि कर जीत का रेकार्ड बनाएं। हाल में हुए विधानसभा चुनाव में केरल में खाता खुलने और असम में सरकार बनाने में आरएसएस की ही रणनीति काम आयी है।

योगी के नाम पर हुआ मंथन
संघ सूत्रों की मानें तो भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव राम माधव ने संघ प्रमुख मोहन भागवत के साथ यूपी चुनाव को लेकर दो दिन तक अहम चर्चा की। चर्चा के दौरान यूपी में भाजपा का चेहरा कौन होगा इस पर भी मंथन चला। माधव ने संघ प्रमुख से गोरखपुर से भाजपा सांसद योगी आदित्यनाथ के नाम पर चर्चा की। संघ का मानना है कि योगी के नाम से यूपी चुनाव में फायदा के साथ नुकसान भी हो सकता है। मुस्लिम मत इकतरफा एक दल के पक्ष में जा सकते हैं। तो वहीं संघ से जुड़े संगठनों ने संघ प्रमुख को जमीनी हकीकत से रुबरु कराया। उन्होंने बताया कि मुस्लिम मत भाजपा को न तो पहले मिला था न ही आगे भविष्य में मिलने वाला है। संघ से जुड़े संगठनों का कहना था कि योगी आदित्यनाथ के सहारे यूपी में कमल खिलाया जा सकता है।

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