
हर माह की 10 तारीख को आयोजित होगा ग्रामीण पोषण दिवस
लखनऊ, गर्भ में आने से लेकर जीवन के पहले दो साल अर्थात जीवन के पहले हजार दिन पोषण की दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। गर्भवती स्वस्थ होगी तो स्वस्थ बच्चे को जन्म देगी तथा भविष्य में स्वस्थ किशोरी ही स्वस्थ माँ बनेगी। इसके लिए आवश्यक है कि गर्भावस्था से लेकर दो वर्ष तक की आयु के बच्चों के परिवारों को पोषण व्यवहार के लिए जागरूक किया जाए। इसको ध्यान में रखते हुये हर माह की 10 तारीख को आंगनबाड़ी केन्द्रों पर ग्रामीण पोषण दिवस मनाने का निर्णय लिया गया है। इसके साथ ही मातृ समिति की बैठक भी आंगनबाड़ी केन्द्रों पर आयोजित की जाएगी।
जिला कार्यक्रम अधिकारी (डीपीओ) अखिलेन्द्र दुबे ने बताया - राज्य पोषण मिशन की महानिदेशक मोनिका एस गर्ग ने इस संबंध में पत्र जारी कर ग्रामीण पोषण दिवस मनाने का निर्देश दिया है। डीपीओ ने बताया कुपोषण का सबसे ज्यादा प्रभाव गर्भ में पल रहे बच्चे व जीवन के पहले दो वर्षों में पड़ता है। यदि इस दौरान बच्चे पर ध्यान नहीं दिया जाता है तो बाद में कुपोषण को दूर करना कठिन हो जाता है।
अखिलेन्द्र ने बताया - ग्रामीण पोषण दिवस पर स्वास्थ्य एवं पोषण विषय पर धात्री महिलाओं के लिए प्रतियोगिता का भी आयोजन किया जाए ताकि गर्भवती एवं छ्ह माह से ऊपर वाली धात्री महिलाओं को अपने स्वास्थ्य एवं बच्चे के लालन-पालन और देखभाल से संबन्धित स्वास्थ्य व्यवहारों को अपनाने के बारे में प्रेरित किया जा सके।
डीपीओ ने बताया - ग्रामीण पोषण दिवस पर केंद्र पर आने वाली गर्भवती, धात्री महिलाओं, बच्चों और उनके परिवार के सदस्यों के बीच ऊपरी आहार पर चर्चा की जायेगी। इसके साथ ही स्वस्थ माँ प्रतियोगिता का आयोजन किया जाएगा जिसमें आठ माह की गर्भावस्था पूरी कर चुकी महिलाएं व छ्ह माह से ऊपर वाली धात्री महिलाओं के लिए मानक के बारे में लोगों को प्रोत्साहित करने के लिए विभिन्न प्रकार की गतिविधियां की जाएंगी। ऐसी गर्भवती महिलायेँ जिनकी गर्भावस्था के आठ माह पूरे हो चुके हों, प्रसव पूर्व चार जाँचें करायीं हो, आयरन फोलिक एसिड( आईएफए) की कम से कम 100 गोलियों व कैल्शियम की कम से कम 200 गोलियों का का सेवन किया हो तथा उनके खून में हीमोग्लोबिन की मात्रा 12 ग्राम प्रति डेसी से अधिक हो, उन्हे आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, मातृ समिति अध्यक्ष,महिला ग्राम प्रधान या वरिष्ठ महिला वार्ड सदस्य के द्वारा सम्मानित किया जाएगा। इसी प्रकार छ्ह माह से ऊपर वाली धात्री महिलाओं जिन्होने अपने शिशु को छ्ह माह तक केवल स्तनपान कराया हो, उसने स्वयं छ्ह माह की अवधि में आईएफए की कम से कम 100 व कैल्शियम की कम से कम 200 गोलियों का सेवन किया हो तथा अपने शिशु को समय से अन्नप्राशन कराया हो। ऐसी महिलाओं को सम्मानित किया जाएगा
अखिलेन्द्र ने बताया- पोषण दिवस पर मातृ समिति की बैठक का भी आयोजन किया जाएगा जिसमें केंद्र पर चिन्हित कुपोषित और अतिकुपोषित बच्चों के पोषण स्तर में सुधार के लिए आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, ग्राम सभा की महिला सदस्यों एवं मातृ समिति की सदस्यों के बीच चर्चा की जाएगी।
Published on:
05 Nov 2019 06:53 pm
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