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सपा ने उन्नाव गैंगेरप केस को देखते हुए कर दी ये बड़ी मांग, कहा प्रदेश में ये शासन हो लागू

आज सपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने प्रेस कांफ्रेंस कर योगी सरकार पर जमकर आरोप लगाया.
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लखनऊ

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Abhishek Gupta

•

Apr 13, 2018

kannauj

Akhilesh

लखनऊ. उन्नाव गैंगरेप मामले में समाजवादी पार्टी ने गुरुवार को उन्नाव में सपा महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष गीता सिंह के नेतृत्व में एक महिला प्रतिनिधिमंडल को भेजा था जिससे वो पीड़ित परिवार से उनका दुःख बांट सके व उनका पक्ष जान सके। प्रतिनिधिमंडल ने इसकी रिपोर्ट सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव को सौंपी जिसके आधार पर आज सपा द्वारा एक प्रेस कांफ्रेंस की गई। इस दौरान मामले में दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की गई।

राष्ट्रपति शासन की उठाई मांग-

आज सपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने प्रेस कांफ्रेंस कर योगी सरकार पर जमकर आरोप लगाया, साथ ही यूपी में धारा 356 लागू कर सरकार को भंग कर देना की मांग व प्रदेश में राष्ट्रपति शासन की मांग की। किरणमय नंदा ने कहा कि उन्नाव मामले में कानून को ताक पर रखकर घटनाओं को अंजाम दिया जा रहा है। इसके बावजूद राजभवन की तरफ से कोई प्रतिक्रिया अभी तक नहीं आई है। वहीं प्रदेश में सर्वोच्च पद पर बैठे व्यक्ति चुप्पी साधे हुए हैं।

महिला प्रतिनिधिमंडल पहुंचे पीड़िता के घर-

सपा राष्ट्रीय उपाध्यक्ष ने आगे बताया कि सपा मुखिया ने सपा महिला सभा की प्रदेश अध्यक्ष गीता सिंह नेतृत्व में एक महिला प्रतिनिधिमंडल को पीड़िता के घर भेजा था जिसके बाद एक रिपोर्ट अखिलेश यादव को सौंपी गई। इसके अनुसार उन्होंने पीड़िता को परेशान करने वाले दोषी पुलिस कर्मियों के खिलाफ भी कार्रवाई की मांग की हैं।

मुआवजे व सुरक्षा की उठाई मांग-

नंदा ने कहा कि इस पूरे मामले के लिए भाजपा सरकार जिम्मेदार है। उन्होंने 50 लाख रुपए पीड़ित परिवार को मुआवजे के रूप में देना चाहिए साथ ही परिवार के एक सदस्यों को नौकरी, आवास और सुरक्षा प्रदान करनी चाहिए।

आरोपी विधायक की गिरफ्तारी क्यों नहीं-

किरणमय ने कहा कि उन्नाव मामले में पुलिस की भूमिका संदिग्ध पाई गई है। पुलिस की मिलीभगत से ही हालात बद से बदतर हुए है। सराकर पर सवाल उठाते हुए उन्होंने कहा कि मामले में आरोपी विधायक के खिलाफ जब गैरजमानती धाराओं में मामला दर्ज किया गया है तो उसके बावजूद जानबूझकर आरोपी विधायक की गिरफ्तारी क्यों नहीं की गई।