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श्रीकांत शर्मा को प्रत्याशी बना भाजपा ने बढ़ाई मुख्यमंत्री पद की लड़ाई

भाजपा के टिकट बंटवारे ने दिया पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में बदलाव का संकेत

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Sanjeev Mishra

Jan 16, 2017

Srikant Sharma

Srikant Sharma

डॉ.संजीव

लखनऊ. भारतीय जनता पार्टी प्रत्याशियों के टिकट की पहली सूची पहले चरण की अधिसूचना जारी होने से एक दिन पहले आई, तो तमाम नए संकेत भी सहेज लाई। पार्टी ने राष्ट्रीय मंत्री श्रीकांत शर्मा को टिकट देकर पार्टी के भीतर मुख्यमंत्री पद के दावेदारों की संख्या बढ़ाई है, वहीं पार्टी के अंदरूनी समीकरणों में बदलाव का भी संकेत दिया है।


सोमवार शाम टिकट घोषणा के समय सिर्फ श्रीकांत शर्मा के नाम पर ही जेपी नड्डा ने अतिरिक्त समय लगाया, उन्हें सबका प्रिय करार दिया और कहा कि शर्मा मथुरा से चुनाव लड़ेंगे। श्रीकांत शर्मा इस समय भाजपा के राष्ट्रीय मंत्री व राष्ट्रीय प्रवक्ता भी हैं। इससे पहले राष्ट्रीय प्रवक्ता रहे सर्बानंद सोनोवाल को पार्टी असम का मुख्यमंत्री बना चुकी है। ऐसे में श्रीकांत शर्मा के टिकट को मुख्यमंत्री पद की दावेदारी से भी जोड़ा जा रहा है। अब चुनाव के बाद पार्टी के पास मुख्यमंत्री पद के लिए एक मजबूत चेहरा भी बढ़ जाएगा। इसके अलावा पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा को कमजोर आंकने वालों को भी मजबूत प्रत्याशी से जवाब मिलेगा।


बंटवारे में मजबूती

श्रीकांत शर्मा को मथुरा से टिकट देकर भाजपा ने न प्रदेश का बंटवारा होने की स्थिति में पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक मजबूत चेहरे को आगे करने का दांव खेला है। भाजपा राज्य बंटवारे की पक्षधर रही है। ऐसे में बुंदेलखंड, पूर्वांचल व पश्चिमी उत्तर प्रदेश के रूप में नए राज्य गठित होने की स्थिति में पार्टी के पास श्रीकांत शर्मा के रूप में एक मजबूत नेता होगा। इसके अलावा पार्टी के मातृ संगठन राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ व विश्व हिन्दू परिषद जैसे अन्य आनुसांगिक संगठनों के लिए महत्वपूर्ण माने जाने वाले मथुरा पर फोकस का भी संदेश दिया है। इन संगठनों के लिए अयोध्या, मथुरा, काशी सर्वाधिक महत्व के केंद्र रहे हैं। काशी में स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हैं, और अब श्रीकांत शर्मा के रूप में मथुरा में भाजपा अपने बड़े नेता को प्रतिनिधित्व सौंपेगी।


ये भी हैं दावेदार

पार्टी में मुख्यमंत्री पद के लिए दावेदारों की कमी नहीं है। राजनाथ सिंह समर्थक चाहते हैं कि वे केंद्रीय गृह मंत्रालय छोड़कर उत्तर प्रदेश वापस आ जाएं। इसी तरह कलराज मिश्र समर्थक उनकी उम्र को भूल कर मुख्यमंत्री बनाने की दावेदारी पेश कर रहे हैं। लखनऊ के महापौर दिनेश शर्मा व केंद्रीय मंत्री मनोज सिन्हा के साथ गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ का नाम तो अक्सर मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में चर्चा में ही रहता है। योगी के समर्थक तो बाकायदा पूर्वांचल में उनके समर्थन में अभियान ही चला रहे हैं। इससे पहले केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी का नाम तेजी से मुख्यमंत्री दावेदार के रूप में उभर चुका है। सपा से डिंपल यादव व कांग्रेस से प्रियंका गांधी के साथ जयंत चौधरी की पत्नी चारु की तिकड़ी बनने की संभावना के बाद भाजपा से स्मृति के साथ अपना दल की नेता अनुप्रिया पटेल का नाम भी फिजां में तैरने लगा है। इन सबसे अलग पार्टी के महामंत्री (संगठन) सुनील बंसल के नाम को लेकर भी सुगबुगाहट चल रही है। कहा जा रहा है कि जिस तरह हरियाणा व असम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नए नाम सामने किये, उसी तर्ज पर उत्तर प्रदेश में भी सुनील बंसल को मुख्यमंत्री बनाने पर विचार हो सकता है।

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