
चुनाव से पहले बांग्लादेश में वर्तमान स्थिति चिंताजनक: अब तक 11 की मौत, 616 घायल (इमेज सोर्स: ANI)
Bangladesh: बांग्लादेश इन दिनों चुनावी हिंसा की चपेट में है। मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार के दौरान कानून-व्यवस्था की स्थिति तेजी से बिगड़ रही है। 12 फरवरी 2026 को होने वाले 13वें संसदीय चुनाव से ठीक पहले राजनीतिक हिंसा चरम पर पहुंच गई है।
ढाका स्थित मानवाधिकार संगठन ‘Ain o Salish Kendra’ (ASK) की रिपोर्ट के मुताबिक, जनवरी 2026 में अकेले 75 घटनाएं दर्ज हुईं, जिनमें 11 लोगों की मौत हो गई और 616 लोग घायल हुए। यह आंकड़ा दिसंबर 2025 की तुलना में कई गुना ज्यादा है, जहां मात्र 18 घटनाओं में 4 मौतें और 268 घायल हुए थे।
चुनावी अभियान शुरू होने (21 जनवरी से) के बाद स्थिति और खराब हुई। अंतिम 10 दिनों में 49 झड़पें हुईं, जिसमें 4 मौतें और 414 घायल शामिल हैं। ज्यादातर हिंसा BNP, जमात-ए-इस्लामी और अन्य समूहों के कार्यकर्ताओं के बीच स्थानीय प्रभाव, संसाधनों पर कब्जे और चुनावी प्रतिद्वंद्विता के कारण हो रही है। यह आंकड़े न केवल लोकतंत्र की मजबूती पर सवाल उठाते हैं, बल्कि शांतिपूर्ण मतदान की उम्मीदों को भी गहरी चोट पहुंचा रहे हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि 22 जनवरी को चुनाव कार्यक्रम की घोषणा और प्रचार अभियान शुरू होने के बाद हिंसक झड़पों में और तेजी आई। एएसके के अनुसार, 21 से 31 जनवरी के बीच 49 झड़पें हुईं, जिनमें चार लोगों की मौत और 414 लोग घायल हुए। इससे साफ है कि मतदान की तारीख नजदीक आते ही हिंसा बढ़ती जा रही है।
मानवाधिकार संगठन ने यह भी बताया कि बढ़ती राजनीतिक हिंसा के बीच पत्रकारों को भी निशाना बनाया जा रहा है। दिसंबर में जहां ड्यूटी के दौरान 11 पत्रकारों के साथ बाधा या हमले की घटनाएं सामने आई थीं, वहीं जनवरी में यह संख्या बढ़कर 16 हो गई। बांग्लादेश के प्रमुख अखबार द डेली स्टार ने यह जानकारी दी।
हिंसा पर चिंता जताते हुए एएसके ने सभी राजनीतिक दलों से संयम बरतने और चुनाव प्रचार के दौरान शांति बनाए रखने की अपील की है। साथ ही, कानून प्रवर्तन एजेंसियों से नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने और उनके संवैधानिक अधिकारों की रक्षा करने का आग्रह किया गया है।
पिछले सप्ताह स्थानीय मीडिया ने बताया था कि चुनाव प्रचार शुरू होते ही उम्मीदवारों और कानून व्यवस्था से जुड़े कर्मियों को निशाना बनाकर धमकियों और हमलों की घटनाएं बढ़ गई हैं, जिससे पूरे देश में चुनावी प्रक्रिया की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं।
बांग्लादेश में अब चुनावी मैदान खून से रंगने लगा है। 12 फरवरी को होने वाले आम चुनाव की शुरुआत होते ही कई इलाकों में गोली चलने, चाकू चलने, तोड़-फोड़ और जमकर झड़पों की खबरें आने लगी हैं। सड़कों पर पत्थरबाजी, जलते वाहन, टूटे माइक्रोफोन और लूटे गए चुनावी कैंप… यह सब अब रोज की बात हो गई है। कई लोगों को गंभीर चोटें आईं, कुछ की जान भी चली गई।
और तो और, चुनाव से जुड़ी चीजें भी नहीं बचीं। कार्यालयों में तोड़फोड़, वाहनों को आग लगाना, मतदान केंद्रों पर लगे सीसीटीवी कैमरे तक उखाड़ फेंके गए या चुरा लिए गए। कल तक जो दल मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार के साथ मिलकर शेख हसीना की अवामी लीग सरकार को उखाड़ फेंकने में जुटे थे, आज वही दल सत्ता की कुर्सी के लिए एक-दूसरे के खिलाफ भिड़ गए हैं। पहले साथ थे, अब दुश्मन! हर कोई चाहता है कि चुनाव जीतकर सत्ता हथियाए और इस होड़ में हिंसा चरम पर पहुंच गई है। यह सिर्फ राजनीति नहीं, बल्कि बदले की आग है जो देश को झुलसा रही है।
Updated on:
04 Feb 2026 02:53 am
Published on:
04 Feb 2026 02:52 am
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