हो और जिसे नजराने में हिंदुओं को दिया जा सके। यह सुनकर जानाशीन अली हुसैन ने ईरान से एक तंदूर मंगाया। इसका नाम बाकरखानी (बड़ी गोल रोटी) था। इसे बनाने में मैदा, मेवे, जाफरान, देसी घी और दूध का इस्तेमाल हुआ था। नवाब ने जब बाकरखानी को तोड़कर चखा तो वो इसके मुरीद हो गए। उन्होंने कहा कि यह सबसे बेहतरीन है। नवाब द्वारा रोटी को चीरने के कारण इसे चीरमाल कहा जाने लगा, जो बाद में शीरमाल हो गया।