
Rajiv Gandhi death Anniversary
पूर्व प्रधानमंत्री राजीव गांधी की आज 32वीं पुण्यतिथि है। आज ही के दिन 1991 में तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में हुए आत्मघाती हमले में उनकी मौत हो गई थी। आज उनकी पुण्यतिथी पर हम आपको उनकी जिंदगी के उस हादसे के बारे में बताएंगे, जिससे पायलट राजीव की जिंदगी बदल गई। कैसे राजनीति से दूर रहने वाले राजीव देश के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने और कैसे उनका एक फैसला उनकी ही जिंदगी पर भारी पड़ गया।
जहाज गिरा तो राजीव सांसद बनें
23 जून 1980 को दिल्ली के आसमान में एक विमान गुलाटियां खाते नजर आया। जब तक लोग समझ पाते, तब तक वह अशोका होटल के पीछे जाकर जमीन पर गिर गया। उसमें सवार दोनों लोगों की मौत हो गई। लोग नजदीक पहुंचे तो देखा उस वक्त की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के बेटे संजय गांधी मृत पड़े हैं। प्रधानमंत्री के बेटे होने के साथ ही वह उत्तर प्रदेश के अमेठी से लोकसभा के सांसद भी थे।
संजय की मौत के बाद 1981 में हुए उपचुनाव में इंदिरा गांधी के कहने पर राजीव गांधी इस सीट पर चुनाव लड़े और लोकसभा पहुंचे। एक बार यहां से जीतने के बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा और अपनी मौत तक लगातार 1981, 1984, 1989 और 1991 तक सांसद बनें।
मां की मौत के बाद प्रधानमंत्री बनें राजीव
पंजाब में आतंकवाद को रोकने के लिए तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने ऑपरेशन ब्लू स्टार चलाया था। जिसमेंआंतकी जरनैल सिंह भिंडरावाला की मौत के साथ ही पवित्र स्वर्ण मंदिर के कुछ हिस्सों को नुकसान पहुंचा था। इससे नाराज होकर प्रधानमंत्री के दो सिख अंगरक्षकों सतवंत सिंह और बेअंत सिंह ने 31 अक्टूबर 1984 को उनकी प्रधानमंत्री आवास में गोली मारकर हत्या कर दी। इस हत्या के बाद कांग्रेस के बड़े नेताओं ने पार्टी की एकता और उस समय देश की परिस्थिति को देखकर राजीव गांधी को प्रधानमंत्री बनने के लिए मनाया और राजीव प्रधानमंत्री बनें।
सोनिया नहीं चाहती थी कि राजीव PM बने
अपनी सास और देश की प्रधानमंत्री की इस तरह से हत्या के बाद सोनिया गांधी बहुत ज्यादा डर गई थी। वह नहीं चाहती थी कि उनके पति राजीव प्रधानमंत्री बने। क्योंकि उनको डर था कि कहीं उनके पति की भी इस तरह से मौत न हो जाए।
इंदिरा गांधी के प्रधान सचिव रहे पीसी एलेक्जेंडर ने अपनी किताब 'माई डेज विथ इंदिरा गांधी' में लिखा है कि इंदिरा गांधी की हत्या के कुछ घंटों के भीतर उन्होंने ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट के गलियारे में सोनिया और राजीव को लड़ते हुए देखा था। राजीव सोनिया को बता रहे थे कि पार्टी चाहती है कि 'मैं प्रधानमंत्री पद की शपथ लूँ'. सोनिया ने कहा हरगिज नहीं, 'वो तुम्हें भी मार डालेंगे' राजीव का जवाब था, 'मेरे पास कोई विकल्प नहीं है। मैं वैसे भी मारा जाऊँगा।'
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ऑपरेशन पवन बना राजीव गांधी की हत्या का कारण
दरअसल 11 अक्टूबर, 1987 को भारतीय शांति सेना ने श्रीलंका में जाफना को लिट्टे के कब्जे से मुक्त कराने के लिए ऑपरेशन पवन शुरू किया था। इसकी पृष्ठभूमि में भारत और श्रीलंका के बीच 29 जुलाई 1987 को हुआ वह शांति समझौता था, जिसमें भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री राजीव गांधी और श्रीलंका के तत्कालीन राष्ट्रपति जे.आर. जयवर्धने ने हस्ताक्षर किया था।
इस समझौते के अनुसार, श्रीलंका में जारी गृहयुद्ध को खत्म करना था, इसके लिए श्रीलंका सरकार तमिल बहुत क्षेत्रों से सेना को बैरकों में बुलाने और नागरिक सत्ता को बहाल करने पर राजी हो गई थी। वहीं, दूसरी ओर तमिल विद्रोहियों के आत्मसमर्पण की बात हुई, लेकिन इस समझौते की बैठक में तमिल विद्रोहियों को शामिल नहीं किया गया था। इससे नाराज होकर आतंकी तमिल संगठन के आतंकवादियों ने राजीव गांधी की 21 मई, 1991 की रात दस बजकर 21 मिनट पर तमिलनाडु के श्रीपेरंबदूर में आत्मघाती हमले में हत्या कर दी।
Published on:
21 May 2023 11:48 am
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