लखनऊ. दुनिया भर में प्रसिद्ध अम्मा 9 मार्च को राजधानी लखनऊ में होंगी। उनके हज़ारों भक्त लखनऊ में भी हैं जो उनके एक दर्शन के लिए तरसते हैं। उनके अनुयायियों के लिए ख़ुशी का मौका है की शनिवार को अम्मा साक्षात दर्शन देने वाली हैं। वह तीसरी बार लखनऊ आने वाली हैं और उनसे मिलने के लिए यूपी और आस पास के राज्यों से अन्यायियों का लखनऊ आना शुरू हो गया है। आपने अम्मा के चमत्कारों के बारे में तो बहुत सुना होगा लेकिन कुछ अनसुनी बातें हैं जो आपने नहीं सुनी। ऐसी अनसुनी बातें पत्रिका आपको बताने जा रहा है। amma" title="amma" src="http://img.patrika.com/upload/images/2016/04/07/amma5-1460037457.jpg" height="500" width="700" align="middle" border="0">
अम्मा का जन्म 27 सितम्बर 1953 को केरल के मछुवारे परिवार में हुआ था। विधि का विधान है की जन्म के समय बच्चा हमेशा रोता है लेकिन अम्मा जन्म के समय मुस्कुराते हुए पैदा हुईं।
वह पांच साल तक पहुंचने से पहले उन्होंने श्रीकृष्ण पर भक्तिपूर्ण गीतों की रचना शुरू कर दी थी
अम्मा को जब उनके अपनों ने त्याग दिया था तब उनका साथ पशु पक्षियों ने दिया। भूख मिटाने के लिए अम्मा बचपन में गाय के थन से सीधे दूध पीती थीं। एक काले रंग का कुत्ता हमेशा उनके साथ सुरक्षा के लिए रहता था। जब वह भक्ति गीत गाती थीं तो कबूतर, तोते आ जाते थे।
अम्मा पृथ्वी को चूमती थीं और पेड़ों को गले लगाती थीं, रात में घंटो ध्यान करती थीं। कभी कभी वह कई दिनों तक समाधी में लीन रहती थीं।
श्रीकृष्ण की भक्ति में वह ऐसा लीन हुई की उनमे श्रीकृष्ण की तरह बचपन में नटखट व्यवहार किया।
अम्मा को उनके पहले ब्रह्मचारी दल 1979 में आये और उन्होंने ही उनको मां श्री माता अमृतानंदमयी देवी का नाम दिया।
अम्मा की औपचारिक शिक्षा कक्षा चार तक है लेकिन विश्व में अपने लाखों अनुयाईयों को दिशा दे रही हैं। सुन्नी बफैलो द्वारा उन्हें डॉक्टरेट की मानद उपाधि दी गई है।वह अमृता विश्व विद्यापीठम की कुलाधिपति है जिसे देश के सर्वोत्तम निजी विश्वविद्यालयों में से एक है