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50 पार कम से कम 25 हजार अक्षम कर्मचारियों को जबरन रिटायर करेगी योगी सरकार

अनिवार्य सेवानिवृत्ति का शासनादेश जारी, तीन माह की नोटिस पर घर भेजने की तैयारी...

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लखनऊ

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Hariom Dwivedi

Jul 07, 2018

up govt will retire 25 thousand

50 पार कम से कम 25 हजार अक्षम कर्मचारियों को जबरन रिटायर करेगी योगी सरकार

पत्रिका इनडेप्थ स्टोरी
लखनऊ. उत्तर प्रदेश की बेलगाम नौकरशाही पर लगाम कसने के लिए योगी सरकार कठोर फैसले लेने जा रही है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विभागाध्यक्षों को स्पष्ट निर्देश दिया है अक्षम और कामचोर अफसरों और कर्मचारियों को बर्खास्त कर दिया जाए। काम न करने वाले कर्मचारियों पर तुरंत कार्रवाई के लिए कहा गया है। राज्य सरकार प्रदेश के 16 लाख कर्मचारियों की स्क्रीनिंग करेगी। 31 जुलाई 2018 तक राज्य सरकार ने ऐसे कम से कम 25 हजार कर्मचारियों को जबरन रिटायर करने का फैसला लिया है जिनकी उम्र 50 साल के ऊपर है, और उनका कार्य असंतोषजनक है। समूह क से लेकर समूह घ के सभी कर्मचारियों की स्क्रीनिंग होगी। स्क्रीनिंग में फेल कर्मचारियों को अनिवार्य सेवानिवृत्ति दे दी जाएगी। सरकार की योजना है जिन कर्मचारियों को जबरन रिटायर किया जाएगा उनके स्थान पर तत्काल बेरोजगार युवाओं को नौकरी दी जाए। इससे सरकार एक तीर से दो निशाना साधने की तैयारी में है।

सुनवाई का कोई मौका नहीं
उप्र सरकार के अपर मुख्य सचिव नियुक्ति एवं कार्मिक मुकुल सिंघल ने प्रदेश के सभी प्रमुख सचिवों और सचिवों को हाल ही शासनादेश जारी किया है। शासनादेश में कहा गया है कि 50 वर्ष आयु के उन कर्मचारियों को जबरन सेवानिवृत्त दे दी जाए जो कार्य करने में अक्षम हैं। 50 वर्ष की आयु के निर्धारण के लिए कट ऑफ डेट 31 मार्च 2018 रखी गयी है। ऐसे सरकारी कर्मचारी जिनकी उम्र 31 मार्च 2018 को 50 वर्ष या इससे अधिक हो गयी है वह स्क्रीनिंग के इस शासनादेश के दायरे में आएंगे। अपर मुख्य सचिव के शासनादेश के मुताबिक नियुक्ति प्राधिकारी किसी भी समय, किसी स्थायी या अस्थायी सरकारी कर्मचारी को नोटिस देकर बिना कारण बताए अनिवार्य सेवानिवृत्त दे सकता है। इस नोटिस की अवधि तीन माह की होगी। खास बात है कर्मचारियों को सुनवाई का कोई मौका भी नहीं दिया जाएगा।

पहले भी जारी हुआ था आदेश
गौरतलब है कि वित्तीय वर्ष 2017-18 में बड़ी संख्या में इसी तरह अधिकारियों और कर्मचारियों को रिटायरमेंट से पहले अनिवार्य सेवानिवृत्त दे दी गयी थी। इस वित्तीय वर्ष में जबरन रिटायर किए जाने वाले कर्मचारियों की अनुमानित संख्या कम से कम 25 हजार रखी गयी है।

काम न करने वालों पर कार्रवाई का आदेश
अनिवार्य सेवानिवृत्ति के इस आदेश के अलावा बेलगाम नौकरशाही पर लगाम कसने के लिए मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने अफसरों को खुली छूट दे रखी है। प्रमुख सचिव ऊर्जा और पावर कारपोरेशन के अध्यक्ष आलोक कुमार अपने विभाग के अभियंताओं और कर्मचारियों के परफारमेंस जांचने के लिए परिपत्र जारी किया है। इसमें प्राइवेट कंपनियों की तरह कर्मचारियों को केआरए भरा जाएगा। इसके तहत काम न करने वाले अभियंताओं और कर्मचारियों को चिन्हित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। इसी तरह कृषि उत्पादन आयुक्त व अपर मुख्य सचिव बेसिक शिक्षा प्रभात कुमार ने भी दो टूक कहा है कि कर्मचारी काम करें या इस्तीफा देकर घर बैठें। उन्होंने अपने विभाग में स्पष्ट कह दिया है कि कामचोरी किसी भी कीमत में बर्दाश्त नहीं है। उन्होंने शिक्षकों को निर्देश जारी किया है कि वे चप्पल पहनकर स्कूल न जाएं। यदि बिना दाढ़ी बनाए बेसिक स्कूलों के अध्यापक स्कूल पहुंच गए तो उनके खिलाफ कार्यवाही की जाएगी उन्होंने शिक्षकों के लिए चार मानक तय किए हैं। खुद मुख्यमंत्री ने अपराध रोकने में नाकाम अफसरों को हटाने और उनके खिलाफ कार्यवाही का आदेश दिया है। सरकार इस तरह बिगड़ी नौकरशाही को पटरी पर लाने की कवायद शुरू कर दी है। लेखपालों की हड़ताल पर भी कड़ा रुख जताते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि हड़ताल पर गये लेखपालों से राजस्व रिकॉर्ड वापस ले लिया जाये।

बेरोजगारों को नौकरी का वादा
राज्य सरकार ने प्रदेश के बेरोजगार युवाओं को नौकरी देने का वादा किया है। अक्षम और अयोग्य कर्मचारियों को हटाकर उनकी जगह खाली पदों को भरने के लिए विशेष अभियान चलाने की योजना है। सूत्रों की मानें तो इस अभियान के तहत कम से कम 25 हजार नयी नौकरियों के द्वार खोलने की योजना है। इस नीति के तहत एक तो सरकार अफसरों पर नकेल कसना चाहती है दूसरे खाली पदों पर बड़ी संख्या में नौकरियां देकर अपना वादा भी पूरा करना चाहती है।

कर्मचारी संगठनों ने विरोध जताया
प्रदेश के कर्मचारी संगठनों ने जबरन रिटायरमेंट के शासनादेश का विरोध करना शुरू कर दिया है। उत्तर प्रदेश सचिवालय संघ के अध्यक्ष यादवेंद्र मिश्रा और कर्मचारी संयुक्त परिषद के पदाधिकारी हरकिशोर तिवारी का कहना है राज्य सरकार के इस शासनादेश का अधिकारी गलत इस्तेमाल करेंगे। पिछली बार भी ऐसे तमाम कर्मचारियों को जबरन रिटायर कर दिया जिनसे अफसरों की नहीं बनती थी। कर्मचारी संगठनों को कहना है किसी को अक्षम कर्मचारी साबित करने के लिए कम से कम दो साल उसके कार्य का मूल्याकंन होना चाहिए। यदि वह अपने लक्ष्य को पूरा करने में अक्षम रहता है तो उसके कारणों की विवेचना के बाद ही कोई फैसला लिया जाना चाहिए।