
बसपा प्रमुख मायावती। फोटो सोर्स-IANS
UP Politics: बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की सुप्रीमो मायावती राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी पर बहुत गुस्से में हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस की दलित-विरोधी सोच के कारण ही बसपा का गठन हुआ था। अब वही कांग्रेस कांशीराम को भारत रत्न देने की बात कर रही है। मायावती ने चेतावनी दी है कि कांग्रेस से सावधान रहने की जरूरत है। उन्होंने X पर पोस्ट करके कांग्रेस की पुरानी नीतियों पर सवाल उठाए हैं।
दरअसल, शुक्रवार को कांग्रेस ने पहली बार लखनऊ में कांशीराम जयंती से जुड़ा बड़ा कार्यक्रम आयोजित किया। इस कार्यक्रम का नाम 'सामाजिक परिवर्तन दिवस' रखा गया था। राहुल गांधी खुद इसमें शामिल हुए। कार्यक्रम में कांशीराम को मरणोपरांत भारत रत्न देने की मांग वाला प्रस्ताव पास किया गया। तय हुआ कि राहुल गांधी इस मांग को संसद में उठाएंगे। यह कदम कांशीराम की जयंती (15 मार्च) से ठीक दो दिन पहले उठाया गया, जिससे राजनीतिक मायने निकाले जा रहे हैं।
राहुल गांधी ने कार्यक्रम में कहा कि कांशीराम समाज में बराबरी की बात करते थे। उन्होंने पेन मॉडल का जिक्र किया कि पेन ऐसा होना चाहिए जो 85% लोगों को फायदा दे, न कि सिर्फ 15% को। राहुल ने कहा कि अगर जवाहरलाल नेहरू जी जिंदा होते तो कांशीराम कांग्रेस के मुख्यमंत्री होते। उन्होंने भाजपा पर आरोप लगाया कि आज समाज को 15% और 85% में बांट दिया गया है। फायदा सिर्फ 15% को मिल रहा है, जबकि 85% पिछड़ रहे हैं।
मायावती ने कहा कि कांग्रेस ने लंबे समय तक केंद्र में सत्ता संभाली, लेकिन कभी दलितों के मसीहा बाबा साहेब डॉ. भीमराव अंबेडकर को भारत रत्न नहीं दिया। न ही उन्हें पूरा सम्मान दिया। ऐसे में सवाल है कि अब वही कांग्रेस कांशीराम को भारत रत्न कैसे दे सकती है? उन्होंने याद दिलाया कि कांशीराम के निधन पर कांग्रेस सरकार ने राष्ट्रीय शोक भी घोषित नहीं किया। उस समय उत्तर प्रदेश में सपा की सरकार थी, उसने भी राजकीय शोक नहीं किया।
मायावती ने आरोप लगाया कि कई पार्टियां तरह-तरह के हथकंडे अपनाकर बसपा को कमजोर करने में लगी हैं। कुछ दलित संगठन और पार्टियां भी कांशीराम का नाम सिर्फ राजनीतिक फायदे के लिए इस्तेमाल करती हैं। उन्होंने बसपा कार्यकर्ताओं से अपील की कि वे सतर्क रहें और 15 मार्च 2026 को कांशीराम जयंती के कार्यक्रमों को उत्तर प्रदेश समेत पूरे देश में सफल बनाएं। बसपा सुप्रीमो ने कहा कि कांशीराम के सिद्धांतों पर चलकर ही दलितों और बहुजनों का उत्थान संभव है।
Updated on:
14 Mar 2026, 12:27 PM IST
Published on:
14 Mar 2026, 12:27 PM IST
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