
जानिए क्या है (CAB) नागरिकता संशोधन बिल, जिस पर छिड़ी है बड़ी बहस
लखनऊ. उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में नागरिकता संशोधन विधेयक 2019 (Citizenship Amendment Bill 2019) को लेकर बड़ी बहस छिड़ी हुई है। इस विधेयक को सिटीजनशिप अमेंडमेंट बिल (Citizenship Amendment Bill) के नाम से भी जाना जाता है। केंद्र सरकार जहां इस विधेयक को लागू करने के लिए पूरी तैयारी कर चुकी है, वहीं विपक्षी दल इसे मुस्लिम विरोधी करार देते हुए इसका विरोध कर रहे हैं। विपक्षी दल इस बिल को धार्मिक आधार पर भेदभाव करने वाला और संविधान की मूल भावना के खिलाफ बता रहे हैं। इसलिए उत्तरप्रदेश के कई जिलों में इसके खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा है। हालांकि एनआरसी और इस विधेयक में काफी बड़ा फर्क है।
नागरिकता बिल (Citizenship Bill) का मूल उद्देश्य पड़ोसी देशों (पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान) में धार्मिक आधार पर सताए गए गैर-मुस्लिम शरणार्थियों को भारत की नागरिकता देना है। बिल में वहां रहने वाले अल्पसंख्यक धर्मों (हिंदू, सिख, जैन, बौद्ध, ईसाई तथा पारसी) के लोगों को कुछ शर्तों के साथ नागरिकता देने का प्रस्ताव किया गया है। नए विधेयक में इस बात का प्रावधान भी किया गया है कि गैरकानूनी रूप से भारत में घुसे लोगों तथा पड़ोसी देशों में धार्मिक अत्याचारों का शिकार होकर नागरिकता मांगने वाले लोगों में अंतर किया जा सके।
नागरिकता संशोधन बिल (Citizenship Amendment Bill) नागरिकता अधिनियम (Citizenship Act) 1955 के प्रावधानों को बदलने के लिए पेश किया गया है, जिससे नागरिकता प्रदान करने से संबंधित नियमों में बदलाव होगा। नागरिकता बिल में इस संशोधन से बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान से आए हिंदुओं के साथ ही सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाइयों के लिए बगैर वैध दस्तावेजों के भी भारतीय नागरिकता हासिल करने का रास्ता साफ हो जाएगा। भारत की नागरिकता हासिल करने के लिए देश में 11 साल निवास करने वाले लोग योग्य होते हैं। नागरिकता संशोधन बिल में बांग्लादेश, पाकिस्तान और अफगानिस्तान के शरणार्थियों के लिए निवास अवधि की बाध्यता को 11 साल से घटाकर 6 साल करने का प्रावधान है।
क्या है नागरिकता अधिनियम 1955
भारतीय नागरिकता अधिनियम 1955 (Indian Citizenship Act 1995) में लागू हुआ था, जिसमें बताया गया है कि किसी विदेशी नागरिक को किन शर्तों के आधार पर भारत की नागरिकता दी जाएगी, साथ ही भारतीय नागरिक होने के लिए जरूरी शर्तें क्या हैं। इस बिल में अबतक पांच बार (1986, 1992, 2003, 2005 और 2015) संशोधन हो चुका है।
नागरिकता संशोधन विधेयक में क्या है प्रस्ताव
नागरिकता (संशोधन) विधेयक 2016 को 19 जुलाई 2016 को लोकसभा में पेश किया गया था। 12 अगस्त 2016 को इसे संयुक्त संसदीय समिति को सौंप दिया गया था। समिति ने इस साल जनवरी 2019 में इस पर अपनी रिपोर्ट दी थी। इसके बाद नौ दिसंबर 2019 को यह विधेयक दोबारा लोकसभा में पेश किया गया, जहां देर रात यह ध्वनिमत से पारित हो गया। इसके बाद 11 दिसंबर 2019 को यह राज्यसभा में पेश किया गया है। अगर नागरिकता संशोधन विधेयक पास हो जाता है, तो अफगानिस्तान, पाकिस्तान और बांग्लादेश के सभी गैरकानूनी प्रवासी हिंदू, सिख, बौद्ध, जैन, पारसी और ईसाई भारतीय नागरिकता के योग्य हो जाएंगे।
Updated on:
12 Dec 2019 03:35 pm
Published on:
11 Dec 2019 08:51 pm
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