
milk Ganga moves in mahasamund
महासमुंद. गुजरात की तर्ज पर महासमुंद में भी दुग्ध की गंगा बहेगी। इसके लिए पशु पालन विभाग ने मसौदा तैयार कर लिया है। यहां बीस नई दुग्ध उद्योग की स्थापना की जाएगी। पशुपालन विभाग ने सर्वे किया था। जिसमें पूरे प्रदेश में महासमुंद जिला दुग्ध उत्पादन में अव्वल है। यहां प्रतिदिन करीब 25 से 30 हजार लीटर दुध का उत्पादन होता है। इसमें जिले की 171 दुग्ध सहकारी सोसायटियां अपनी महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही हैं। कुल 7100 सदस्य जुड़े हैं, इनमें 1241 महिलाएं भी शामिल हैं। इनके प्रयास से आज जिला दुग्ध उत्पादन के क्षेत्र में नई बुलंदियों को छू रहा है।
इसे और गति देने कलक्टर ने अधिकारियों के साथ बैठक कर योजना बनाई है। उत्पादकता को बढ़ाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने विभाग से प्रस्ताव मंगाया था, फाइल सौंप कलक्टर को सौंप दी गई है। खास बात यह है कि देवभोग दुग्ध उत्पादक समूह को भी इसमें शामिल किया गया है। विभाग और देवभोग समूह ग्रामीण अंचलों में दुग्ध व्यवसाय को बढ़ावा देने के लिए लोगों को जागरूक करेंगे। ताकि, ज्यादा से ज्यादा लोग जुड़ सकें। साथ ही हितग्राहियों को मवेशी खरीदने के लिए लोन भी दिया जाएगा।
इतनी जगहों में बनेगी सोसाइटियां
सरायपाली में 6
बसना 4
पिथौरा 4
महासमुंद 3
बागबाहरा 3
यह है योजना की रणनीति
राज्य पोषित डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत वर्ष 2015-16 की कार्ययोजना पशुपालन विभाग ने तैयार कर ली। इसके तहत 1000 हजार पुश पालक हितग्राहियों को दुग्ध सोसायटी के माध्यम से चयन कर लोन व अनुदान मिलेगा। ऐसे क्षेत्र जहां दुग्ध सोसायटी नहीं है, वहां सोसायटी का गठन किया जाएगा। वहीं सोसायटियों को दुग्ध संकलन मार्ग से जोड़ा जाएगा। अगर जरूरत पड़ी, तो नए दुग्ध संकलन मार्ग की स्थापना की जाएगी। इस बार 532 हितग्राहियों का चयन हुआ है। वहीं, कलक्टर उमेश अग्रवाल का निर्देश है कि तीन दुग्ध उद्योग की स्थापना की जाए। साथ ही उन्होंने कहा है कि इस योजना का लाभ ज्यादा से ज्यादा गरीबों को मिले। इस तरह कुल 1000 हितग्राहियों को चुनने का लक्ष्य पशुपालन विभाग को दिए हैं।
20 सोसायटियों का होगा गठन
दुग्ध उत्पादन बढ़ाने के लिए 2015-16 में राज्य पोषित डेयरी उद्यमिता विकास योजना के तहत 20 नए दुग्ध सोसायटियों का गठन विकास खंडवार किया जाएगा। इस लक्ष्य की पूर्ति के लिए पशु चिकित्सक व सहायक पशु चिकित्सक क्षेत्र अधिकारी समाधान-36 के सेक्टरों में विशेष शिविर लगाएंगे। यहां वृहद रूप से कार्य का संपादन किया जाएगा। विभाग की कोशिश है कि, यह काम तीन महीने के भीतर होगा। हितग्राहियों को चिन्हांकित कर बैंक से लोन भी दिलाया जाएगा।
- दुग्ध विकास को गति प्रदान करने लगातार प्रयास जारी है। सोसायटियों के साथ मिलकर विभाग उत्पादन और हितग्राहियों को जोडऩे के लक्ष्य को पूरा करने में जुटा है।
डॉ. धर्मदास झारिया, उप संचालक पशु चिकित्सा सेवाएं, महासमुंद
मधुकर दुबे

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