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एक्टर आयुष्मान खुराना बता रहे हैं कि कैसे संघर्ष करते-करते वे एक्टर बने-
बई में अपने शुरुआती संघर्ष के एक दिन में अंधेरी के एक मॉल में खड़ा था, वहां मैंने शाहरुख की फिल्म ‘ओम शांति ओम’ का एक बहुत बड़ा होर्डिंग देखा। मन में सोचा कभी मेरा भी आएगा पोस्टर ऐसा? बाद में जब ‘विक्की डोनर’ रिलीज हुई तो ठीक उसी जगह मेरा पोस्टर लगा हुआ था। मैं मानता हूं कि कॅरियर में स्थायी सिर्फ आपकी दिलचस्पी होती है। मेरी दिलचस्पी थी, इसलिए मैंने गायन, एकरिंग, एक्टिंग और राइटिंग तक में हाथ आजमाया। कॉलेज के दिनों में मैंने रेल के डिब्बे-डिब्बे में घूम-घूम कर गाया और पैसे जुटाए हैं।
यह 2003 की बात है, जब जी टीवी के एक टैलेंट शो सिने स्टार की खोज के शुरुआती राउंड में ही मुझे रिजेक्ट कर दिया गया था, दुख हुआ लेकिन यह दुख मेरी एक्टिंग में दिलचस्पी से बड़ा नहीं था। आगे चलकर वह दिन भी आया जब इसी शो के प्रमोशनल इवेंट में मुझे ससम्मान बुलाया गया। मैं वहां गया और मैंने उन्हें बताया कि अगर मैं यहां रिजेक्ट नहीं हुआ होता तो शायद कहानी दूसरी होती। वास्तव में, चंडीगढ़ की एक मिडिल क्लास फैमिली से हूं, मुंबई आकर संघर्ष करना मेरा अपना फैसला था और मैं इस पर टिका रहा।
भीड़ से हटकर चलिए
जब मैं मुंबई आया था तो यहां की भीड़ से थोड़ा घबराता था। मुझे शुरू से ही पता था कि भीड़ का हिस्सा बनकर आप कुछ नहीं पा सकते। अगर आपको जीवन में कुछ करना है तो भीड़ से अलग हटकर चलिए। देखा-देखी वह सब मत कीजिए जो दूसरे कर रहे हैं। वह कीजिए, जिसके लिए आपका दिल आपसे कहता है। उसे अपने ही अलग अंदाज में कीजिए। कोई भी इच्छा तभी पालिए, जब आप खुद को उसके लायक समझने लगें।
खारिज होने का मजा
अगर आप सफर का लुत्फ उठाते हैं तो जीवन एक संघर्ष की तरह प्रतीत नहीं होता है। मुझे इतनी बार खारिज किया गया कि मुझे इसका ही मजा आने लगा। मुझे बताया गया कि मैं हीरो की तरह नहीं दिखता हूं, न ही मुझमें स्टार जैसी कोई बात है। खुद पर भरोसा करेंगे तो संघर्ष करते समय कभी कमजोर नहीं पड़ेंगे।
Published on:
02 Sept 2018 11:21 am
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