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मैंने यही सीखा है कि दिल लगाकर काम करो। जैसे ईश्वर को फूल अर्पित कर देते हैं वैसे ही मैं अपने काम को ईश्वर के सामने अर्पित करता रहा हूं। अच्छा या बुरा, यह देखना भगवान का काम है। घर से काम पर जाते समय मैं उस जगह पर शीश नवाता हूं, जहां मेरी मां बैठा करती थी। मां पर मेरी अकूत श्रद्धा है, मुझे ऊर्जा ही इस बात से मिलती आई थी कि मुझे मां के लिए कुछ करना है।
सबने कुछ न कुछ सिखाया
मुझे हर चीज करते-करते मिली है। मैं शुरू से डांसर नहीं था। मैंने जॉन ट्रवोल्टा की एक फिल्म देखी ‘सैटरडे नाइट फीवर’ नाम की और तब से डांस सीखना शुरू कर दिया। राम मास्टरजी ने बिना फीस लिए हुए मुझे एक्शन सिखाया। सरोजजी ने डांस की फीस माफ कर दी। रोशन तनेजाजी ने मेरी एक्टिंग की फीस माफ कर दी। मुझे लगता है कि हमारे परिवार का पैसा जरूर चला गया था लेकिन मुझे लगन दे गया था।
गुरुओं का करो सम्मान
14-15 साल की उम्र से ही निर्माताओं के पास काम के लिए जाने लगा। लेकिन मुझे काम मिला 21 साल की उम्र में, जब मैंने बीकॉम पूरा कर लिया। एक दिन लोकल ट्रेन से घर वापसी कर रहा था तो एक साधु महाराज मिले। वे बोले कि तेरा अच्छा समय शुरू होने वाला है। अब तुझे हर क्षेत्र में कई गुरु मिलेंगे और तू उनका सम्मान हमेशा करते रहना। यह मेरे जीवन का टर्निंग प्वॉइंट था।
काम एक पूजा
मां को शक्ति, पिता को शिव और पत्नी को लक्ष्मी का रूप मानता हूं, बच्चों को प्रसन्न रखना मेरे लिए कृष्ण की पूजा है और ज्ञान अर्जित करते रहना गणेश को ध्याना है। सफलता के लिए काम को पूजा बनाएं।
मेरे पिताजी फिल्मों में हीरो हुआ करते थे। महबूब खान साहब ने उन्हें ब्रेक दिया था। मेरी मां ठुमरी की शास्त्रीय संगीत गायिका हुआ करती थीं। लेकिन बीच में मेरा परिवार मुसीबत में आ गया था। मैं शुरू से सोचता था कि जल्दी से किसी काम पर लग जाऊं। कुछ करने का जज्बा बहुत कम उम्र से हावी था।
Published on:
16 Aug 2020 01:21 pm
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