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शिव नाडार, यूं बने एक मामूली इंजीनियर से अरबपति

चसीएल और शिव नाडर फाउंडेशन के फाउंडर-चेयरमैन शिव नाडार ने आम आदमी से अरबपति बनने तक का सफर तय किया है। इस सफर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा।

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Sunil Sharma

Aug 14, 2018

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जहां अधिकतर लोग अपना पूरा जीवन दूसरों की नौकरी करते हुए निकाल देते हैं, वहीं कुछ लोग शून्य से शुरु कर अरबों-खरबों का बिजनेस खड़ा कर लेते हैं। कुछ इसी तरह की कहानी है शिव नाडर की। एचसीएल और शिव नाडर फाउंडेशन के फाउंडर-चेयरमैन शिव नाडार ने आम आदमी से अरबपति बनने तक का सफर तय किया है। इस सफर में उन्हें कई चुनौतियों का सामना करना पड़ा, लेकिन उनका आत्मविश्वास हमेशा उन्हें आगे बढऩे के लिए प्रेरित करता रहा। तमिलनाडु के थूठुकुडी जिले के छोटे से गांव मुलाइपुझी में १९४५ में जन्मे शिव ने कुम्बकोनम के टाउन हायर सेकेंडरी स्कूल से प्रारंभिक शिक्षा हासिल की। द अमरीकन कॉलेज मदुरै से उन्होंने प्री-यूनिवर्सिटी डिग्री प्राप्त की।

इसके बाद पीएसजी कॉलेज ऑफ टेक्नोलॉजी, कोयम्बटूर से इलेक्ट्रिकल एंड इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग की डिग्री पूरी की। शिव ने अपना कॅरियर १९६७ में पुणे में वालचंद ग्रुप ऑफ इंजीनियरिंग से शुरू किया। उनके जेहन में खुद का कोई वेंचर शुरू करने का विचार कुलबुला रहा था, लिहाजा उन्होंने थोड़ा अनुभव हासिल करने के बाद अपने कुछ युवा साथियों के साथ मिलकर माइक्रोकॉम्प कंपनी की शुरुआत की, जिसके जरिए वे भारतीय मार्केट में टेलीडिजिटल कैलकुलेटर्स बेचने लगे। फिर उन्होंने १९७६ में एक लाख ८७ हजार रुपए के निवेश के साथ hcl (हिंदुस्तान कम्प्यूटर्स लिमिटेड) शुरू की। फिर उन्होंने १९८० के दौरान सिंगापुर में अपनी ब्रांच खोलकर एचसीएल को एक इंटरनेशनल कंपनी बनाया और पहले साल में कंपनी ने १० लाख रुपए कमाए।

इसके बाद शिव अपनी कंपनी को लगातार नई ऊंचाइयों पर पहुंचाने में जुट गए। धीरे-धीरे आइटी मार्केट में उनकी कंपनी की एक अलग पहचान बन गई। १९९६ में शिव ने चेन्नई में एसएसएन कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग की स्थापना की। शिव चाहते थे कि इंडियन स्टूडेंट्स विदेशी यूनिवर्सिटीज के साथ रिसर्च प्रोजेक्ट्स में भी आगे बढक़र भाग लें। लिहाजा उन्होंने स्टूडेंट्स को इस दिशा में भी प्रमोट किया। शिव मानते हैं कि बिना लक्ष्य के सफलता प्राप्त नहीं की जा सकती, इसलिए सपने देखें और अपना लक्ष्य तय करें और इस लक्ष्य को पाने में जुट जाएं। आपको सफलता एक न एक दिन जरूर मिलेगी।