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हार्वर्ड यूनिवर्सिटी पर लगा नस्लीय भेदभाव का आरोप!

हार्वर्ड की कानूनी टीम ने लिखा कि स्टूडेंट्स फॉर फेयर एडमिशंस ने जो आंकड़े पेश किए हैं वो नाकाफी हैं।

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जयपुर

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Sunil Sharma

Aug 12, 2018

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विश्व के जाने-माने विश्वविद्यालय हार्वर्ड यूनिवर्सिटी ने कोर्ट में उस मामले को चुनौती दी है जिसमें विश्वविद्यालय पर छात्रों के प्रवेश में पूर्वाग्रह से ग्रसित होने का आरोप लगाया गया है। फेयर एडमिशन मूवमेंट से जुड़े छात्रों ने विश्वविद्यालय के एक समूह पर आरोप लगाया था कि अमरीकी और एशियाई मूल के विद्यार्थियों को प्रवेश देने में जानबूझकर भेदभाव करता है। इससे जुड़े मुकदमे की सुनवाई में विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से दावा किया गया कि यह भ्रामक प्रचार है। हार्वर्ड की कानूनी टीम ने लिखा कि स्टूडेंट्स फॉर फेयर एडमिशंस ने जो आंकड़े पेश किए हैं वो नाकाफी हैं।

अमरीकी न्याय विभाग ने अप्रैल में कहा था कि इस मामले में विभाग का पूरा ध्यान है और उन्होंने न्यायाधीश से प्रवेश के आंकड़े सार्वजनिक करने का आग्रह भी किया। इसके जवाब में हार्वर्ड ने कहा कि उसने एडमिशन प्रोसेस की जांच के लिए पहले ही सरकार को जानकारी दे दी है। छात्रों के वकीलों ने दावा किया कि आंकड़ों में एशियाई-अमरीकी छात्रों के विरुद्ध बड़े पैमाने पर भेदभाव सामने आया है।

हार्वर्ड के मुताबिक यहां किसी भी समूह से भेदभाव नहीं किया जाता है। आंकड़े बताते हैं कि एशियाई-अमरीकी छात्रों के प्रवेश की दर पिछले दशक में 29 प्रतिशत बढ़ी है।

हार्वर्ड में इस साल स्वीकृत कुल प्रवेशों की लिस्ट इस प्रकार हैं-
महिलाएं छात्र - 50.1
एशियाई-अमरीकी छात्र - 22.7
अफ्रीकी-अमरीकी छात्र - 15.5
लैटिन आवेदक छात्र - 12.2
मूल अमरीकी छात्र - 02