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आइए जानते हैं दो माह के बच्चे को छोड़ पुलवामा आतंकी हमले में शहीद हुए रोहिताश के बारे में उनसे जुडी खास बातें

Rohitash Lamba Special Story

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Rohitash Lamba Special Story

Rohitash Lamba Special Story

राजस्थान के जयपुर ग्रामीण के एक छोटे से गांव गोविंदपुरा बासड़ी में 14 जनवरी 1991 को जन्मे रोहिताश देश के लिए शहीद हो गए और पूरे देश के दिलों में हमेशा के लिए अमर हो गए। पुलवामा में हुए आतंकी हमले में देश के 44 बहादुर जवान शहीद हो गए। हमला फिदायीन था जिसके लिए SUV कार को काम में लिया गया था। कार में विस्फोटक पदार्थ (IED) भरा हुआ था। जवान बस से जा रहे थे उसी वक्त कार से बस को टक्कर मारी गई, जिससे बड़ा ब्लास्ट हुआ। रोहिताश की शादी एक साल पहले ही हुई थी। 10 दिसंबर को ही बच्चे का जन्म हुआ था। रोहिताश बच्चे के जलवा के कार्यक्रम में छुट्टी लेकर आए थे, जो 1 जनवरी को ही ड्यूटी पर गए थे।

रोहिताश की प्रारंभिक शिक्षा
गोविंदपुरा बासड़ी गांव की आबादी कम है और शिक्षा के लिए अब तो निजी और राजकीय विद्यालय भी गाँव में है। लेकिन रोहिताश की शुरुआती पढाई नजदीकी गाँव बिलान्दरपुर में हुई। यहां एक प्राइवेट स्कूल से कक्षा 1 से लेकर 12वीं तक की पढाई पूरी की। आगे की पढाई रोहिताश ने राजकीय महाविद्यालय चिमनपुरा से पूरी की थी। रोहिताश शुरू से ही सेना में जाने को लेकर उत्सुक थे। 12वीं के बाद सेना भर्ती के लिए दौड़ की तैयारी करना और उसी के प्रति एक जूनून पैदा करना तो कोई उनसे सीखें। सेना भर्ती के साथ ही सशस्त्र बलों की भर्ती की तैयारी भी साथ में करते रहे। रोहिताश बचपन से ही अनुशासन के पक्के थे। कर्मचारी चयन आयोग द्वारा आयोजित की गई कांस्टेबल की भर्ती में उन्हें वेटिंग लिस्ट में जगह मिली थी। 2013 में वेटिंग लिस्ट से रोहितश को CRPF की नौकरी मिली थी। नौकरी से रोहिताश के घरवाले बहुत खुश थे लेकिन शहादत ने परिवार को अंदर से तोड़कर रख दिया। पांच भाई -बहनों में सबसे बड़े रोहिताश थे जिनकी उम्र महज 28 वर्ष से भी कम रही।

दो महीने के बच्चे की जलवा के कार्यक्रम पर आये थे रोहिताश
रोहिताश की शादी को ज्यादा वक्त नहीं हुआ। वो अपने बच्चे के जन्म पर होने वाले जलवा के कार्यक्रम में आए हुए थे। 1 जनवरी को छुट्टी पूरी होने के बाद वो कश्मीर गए ही थे कि ये खबर परिवार वालों के साथ पूरे देश को सुनने को मिली। इस खबर से पूरा देश गुस्से में है। रोहिताश सेना की तैयारी करने वाले सभी युवाओं के साथ भी समय निकालकर जाते थे। सुबह रैली भर्ती की तैयारी करने वाले युवा वर्ग को अपनी तरफ से टिप्स भी देते थे। जिस ग्राउंड से दौड़कर युवा फौजी बनता है वो छुट्टी आने पर उस ग्राउंड पर साथियों से मिलने जरूर जाता है।